पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
पौष कृष्ण पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |
आज दशमी तिथि 06:50 PM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र हस्त 08:18 AM तक उपरांत चित्रा | सौभाग्य योग 11:45 AM तक, उसके बाद शोभन योग | करण विष्टि 06:50 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 04:19 PM – 05:38 PM है | आज 09:41 PM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा |
ऐसा साहित्य पढ़ें, जो हम पर सकारात्मक प्रभाव डाले
मनुष्य जो देखता-सुनता है, वो दृश्य-शब्द जब वो भीतर महसूस करता है, तो उसके मिरर न्यूरोन्स पर वो अंकित हो जाते हैं। जब हम कोई अच्छी चीज देखते हैं, अच्छी बात सुनते हैं, तो आनंद में डूब जाते हैं, निर्भय हो जाते हैं, आत्मविश्वास से भर जाते हैं। और जब भी कोई अप्रिय दृश्य देखते या सुनते हैं तो उदास, चिड़चिड़े हो जाते हैं, अवसाद में डूब जाते हैं।
शंकर जी ने पार्वती जी को जब रामकथा सुनाई तो समापन पर पार्वती जी ने शंकर जी से कहा- धन्य धन्य मैं धन्य पुरारी। सुनेउँ राम गुन भव भय हारी। हे त्रिपुरारि, मैं धन्य हूं, जो मैंने जन्म-मृत्यु के भय को हरण करने वाले श्रीराम के गुण-चरित्र सुने।
पार्वती बिलकुल सही कह रही हैं कि मैं धन्य हो गई, भयमुक्त हो गई। धन्य होने का अर्थ है इतना आनंद आया कि इसके बाद कुछ करने, सोचने के लिए नहीं रहा। और भयमुक्त तो होना ही चाहिए। इसलिए ऐसा साहित्य पढ़ें, ऐसी बातें देखें-सुनें, जो हमारे भीतर पॉजिटिव प्रभाव रखें। रामकथा उन्हीं में से एक है।
आज का भगवद् चिन्तन
जीवन जीना भी सीखें
मन के दर्पण में नित्यप्रति अपने आपको निहारते रहो। जिस प्रकार दर्पण झूठ नहीं बोलने देगा उसी प्रकार ज्ञान भयभीत नहीं होने देगा, सत्य कमजोर नहीं होने देगा, प्रेम ईर्ष्या नहीं करने देगा और विश्वास निराश नहीं होने देगा। अनित्य सुख की चाह में दिन-रात का परिश्रम अथवा सद्गुणों के आश्रय में शाश्वत सुख की प्राप्ति का प्रयास, हम दोनों के चुनाव के लिए स्वतंत्र हैं।
जीवन मिल जाना ही पर्याप्त नहीं, जीवन जीना भी आना चाहिए। परमात्मा द्वारा हमें विभिन्न भोग योनियाँ भी प्रदान की जाती हैं, इसलिए मानव जीवन केवल भोगों को भोगने के लिए नहीं हो सकता। हमें भोग योनि इसीलिए प्राप्त होती हैं ताकि भोगों से प्राप्त नश्वर सुख के प्रति हमारा आकर्षण कम हो एवं मन शाश्वत सुख की खोज में लग जाये। जीवन हमारा है, इसलिए इसके कल्याण का साधन भी हमको ही करना होगा।
आज का विचार
किसी भी व्यक्ति का आदर केवल उनकी सम्पत्ति सम्पन्नता के कारण नहीं करना चाहिये अपितु उनका सम्मान उनकी उदारता, ज्ञान एवं व्यवहार के कारण करना चाहिये.