पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |आज षष्ठी तिथि 02:54 AM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र चित्रा 02:28 AM तक उपरांत स्वाति | शूल योग 11:40 PM तक, उसके बाद गण्ड योग | करण गर 02:02 PM तक, बाद वणिज 02:54 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 09:54 AM – 11:17 AM है | आज 01:21 PM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा |
आज का विचार
बहुत बार जीवन में हमारी अपेक्षा के अनुरूप फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है। अपेक्षा के अनुरूप फल की प्राप्ति न हो पाना ही हमारे जीवन में दुःखों का एक प्रमुख कारण भी है.!
आज का भगवद् चिंतन
विश्वास करना तो सीखें
हमारे समझने और स्वीकार करने भर की देर है, बाकी सच्चाई तो यही है, कि उन प्रभु के सिवा अपना हित साधन करने वाला एवं अभय प्रदान करने वाला दूसरा कोई हो ही नहीं सकता है। हम कितने ही बलवान, सामर्थ्यवान एवं संपत्तिवान ही क्यों न हों लेकिन विपत्ति काल में उस प्रभु के सिवा कोई हमारा सहायक, कोई हमें अभय प्रदान करने वाला नहीं हो सकता है।
जब बुद्धि में भय व्याप्त हो जाए तो प्रभु के शरणागत हो जाना ही उससे निवृत्ति का एक मात्र उपाय है। भय कुछ खोने का हो, भय शत्रु का हो अथवा तो भय प्राणों का ही क्यों न हो प्रत्येक स्थिति में प्रभु की शरण ही हमें भय से मुक्त कराकर अभय प्रदान करती है। जहाँ जीव के स्वयं का अथवा सबका बल क्षीण हो जाता है, वहाँ से आगे प्रभु द्वारा सभी प्रकार से अपने शरणागत को संभाल लिया जाता है।