पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है प्रदोष व्रत|
आज त्रयोदशी तिथि 03:13 AM तक उपरांत चतुर्दशी | नक्षत्र श्रवण 11:38 PM तक उपरांत धनिष्ठा | शोभन योग 01:52 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग | करण कौलव 03:46 PM तक, बाद तैतिल 03:13 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 10:52 AM – 12:25 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – भाद्रपद
तिथि
- शुक्ल पक्ष त्रयोदशी – Sep 05 04:08 AM – Sep 06 03:13 AM
- शुक्ल पक्ष चतुर्दशी – Sep 06 03:13 AM – Sep 07 01:41 AM
नक्षत्र
- श्रवण – Sep 04 11:43 PM – Sep 05 11:38 PM
- धनिष्ठा – Sep 05 11:38 PM – Sep 06 10:55 PM
आज का विचार
किसी से ईर्ष्या करके मनुष्य उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, परन्तु अपनी नींद और सुख चैन अवश्य खो देता है.
आज का भगवद् चिन्तन
प्रेमपूर्ण जीवन
प्रेम और पवित्रता में जिया गया जीवन ही प्रभु का भी प्रिय बन जाता है। प्रेम से किसी के ऊपर विजय प्राप्त करना ही सच्ची विजय है। क्रोध से, छल से अथवा बल से किसी एक मनुष्य को जीत पाओगे लेकिन प्रेम ही ऐसा शस्त्र है, जिससे सारी दुनिया को जीता जा सकता है। अपनी बात मनवाने के लिए अपने अधिकार या बल का प्रयोग करना किसी मनुष्य की अहमता का लक्षण है।
जो कार्य मुस्कुराकर और प्रेम से बोलकर कराया जा सकता है, उसे क्रोध से करवाने की आवश्यकता ही नहीं है। आज प्रत्येक घर में ईर्ष्या, संघर्ष, दुःख और अशांति का जो वातावरण है, उसका एक ही कारण है और वह है प्रेम का अभाव। आग को आग नहीं बुझाती, पानी बुझाता है। प्रेम ही वो भाषा है जिसे पशु-पक्षी भी समझते हैं। तुम प्रेम बाटों, इसकी सुगंध तुम्हारे जीवन को भी सुगंधित कर देगी।