पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |
आज अष्टमी तिथि 11:09 AM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र पुनर्वसु 11:54 AM तक उपरांत पुष्य | सिद्ध योग 04:11 AM तक, उसके बाद साध्य योग | करण कौलव 11:10 AM तक, बाद तैतिल 10:47 PM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 03:05 PM – 04:32 PM है | आज चन्द्रमा कर्क राशि पर संचार करेगा |
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – कार्तिक
- अमांत – आश्विन
तिथि
- कृष्ण पक्ष अष्टमी – Oct 13 12:24 PM – Oct 14 11:09 AM
- कृष्ण पक्ष नवमी – Oct 14 11:09 AM – Oct 15 10:34 AM
नक्षत्र
- पुनर्वसु – Oct 13 12:27 PM – Oct 14 11:54 AM
- पुष्य – Oct 14 11:54 AM – Oct 15 12:00 PM
आज का विचार
अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति नक्षत्रों की प्रतीक्षा नहीं करता। जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर – उधर देखे, उस पर कभी विश्वास न करो.
आज का भगवद् चिन्तन
कर्म को धर्म बनायें
मंदिर में पूजा अवश्य करें लेकिन उसके साथ-साथ अपने प्रत्येक कर्म को भी पूजा बनाना अवश्य सीखिये। जीवन को इतनी निष्ठा, दिव्यता एवं उच्चता के साथ जिया जाना चाहिए कि हमारा प्रत्येक कर्म ही धर्म बन जाए। धर्म को कर्म से अलग करने जैसा भी नहीं है। धर्म को अलग से करने की अपेक्षा हमारा प्रत्येक कर्म ही धर्ममय बन जाए, इस बात के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए।
हमारा बोलना, सुनना, देखना और सोचना प्रत्येक आचरण इतना विवेकपूर्ण, ज्ञानमय एवं मर्यादित हो कि ये सब अनुष्ठान जैसे ही लगने लग जाएँ। धर्म के लिए अलग से कर्म करने की आवश्यकता नहीं है अपितु जो हो रहा है, उसी को ऐसे पवित्र भाव से करें कि वही धर्म बन जाए। हमारा प्रत्येक कर्म, हमारा व्यवहार एवं हमारा आचरण धर्ममय बन सके यही तो प्रभु आराधना का स्वरूप है। निष्ठापूर्वक पवित्र भावना से किया गया कर्म ही तो धर्म भी बन जाता है।