आज का पंचांग : प्राप्ति ही नहीं, तृप्ति भी आवश्यक

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

जी तोड़ मेहनत करने में कभी पीछे मत हटिएगा। कड़ा परिश्रम आपको इस बात के लिए प्रेरित करेगा कि जिंदगी में यदि कोई बड़ा जोखिम उठाना हो, तो आप उठा लेंगे। तीन बातों को साधिए तो कड़ा परिश्रम तकलीफ नहीं पहुंचाएगा। स्वास्थ्य, एकाग्रता और समय प्रबंधन। क्योंकि कड़े परिश्रम के बाद यदि परिणाम अनुकूल नहीं मिलता है, तो लोग और टूट जाते हैं।

यदि आपने स्वास्थ्य, समय और एकाग्रता साधी है, तो अचानक हुई कोई घटना या प्रतिकूल परिणाम में आप अपने आपको आश्वस्त कर सकेंगे। समुद्र मंथन में निकलना था अमृत, पर सबसे पहले निकला विष। जो सोचा वैसा नहीं हुआ, तब क्या करें।

देवताओं ने समझदारी दिखाई और विष्णु जी के पास पहुंच गए, उन्होंने शंकर जी के पास भेजा, विष शंकर जी ने पिया, और फिर अमृत निकालने की तैयारी हो गई। यह घटना हमें समझाती है कि कड़ा परिश्रम करने के बाद अनुकूल परिणाम नहीं मिलें, तो थक मत जाइएगा, ईश्वरीय शक्ति पर भरोसा जरूर रखिएगा, वो कोई न कोई रास्ता निकाल देगी।

आज का पंचांग

  • दिनांक : 19 फरवरी 2026
  • वार : गुरुवार
  • माह (अमावस्यांत) : फाल्गुन
  • माह (पूर्णिमांत) : फाल्गुन  
  • ऋतु : शिशिर
  • आयन : उत्तरायण
  • पक्ष : शुक्ल पक्ष       
  • तिथि: द्वितीया तिथि (दोपहर 03:58 तक) उसके बाद तृतीया तिथि
  • नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (रात 08:51 तक) उसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
  • योग: सिद्ध योग (रात 08:41 तक) उसके बाद साध्य योग
  • करण: कौलव करण (दोपहर 03:58 तक) उसके बाद तैतुला करण
  • चंद्र राशि: कुंभ (दोपहर 02:59 तक) उसके बाद मीन राशी
  • सूर्य राशि: कुंभ
  • अशुभ समय: 
  • राहु काल: दोपहर 02:06 से दोपहर 03:31 बजे तक
  • शुभ मुहूर्त:
  • अभिजित : दोपहर 12:18 से दोपहर 01:03
  • सूर्योदय: सुबह 07:01
  • सूर्यास्त : शाम 06:20
  • संवत्सर : विश्वावसु
  • संवत्सर(उत्तर) : सिद्धार्थी
  • विक्रम संवत: 2082 विक्रम संवत
  • शक संवत: 1947 शक संवत

आज का चिंतन

काफी अकेला हूं या अकेला काफी हूं, शब्द वही हैं, केवल क्रम बदला है, किन्तु भावार्थ बिल्कुल बदल गया, यही अन्तर है नकारात्मक और सकारात्मक नजरिए का, सकारात्मक सोच जीवन जीने का तरीका ही बदल देती है।

आज का भगवद् चिंतन

प्राप्ति ही नहीं, तृप्ति भी आवश्यक

प्राप्ति हमारी प्रसन्नता का मापक नहीं अपितु तृप्ति हमारे जीवन में प्रसन्नता का मापक है। केवल वाह्य सुख साधनों से किसी की सफलता अथवा प्रसन्नता का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। हमारा बौद्धिक स्तर ही हमें किसी घटना से अधिक अथवा कम प्रभावित करता है। आंतरिक सूझ-बूझ के अभाव में एक धनवान व्यक्ति भी उतना ही दुःखी हो सकता है, जितना एक निर्धन व्यक्ति और आंतरिक समझ की बदौलत एक निर्धन व्यक्ति भी उतना ही सुखी हो सकता है जितना एक धनवान।

जीवन में प्रायः संग्रह करने वालों को रोते और बांटने वालों को हँसते देखा गया है। सुख और दुःख का मापक हमारी आंतरिक प्रसन्नता ही है। किस व्यक्ति ने कितना पाया यह नहीं अपितु कितना तृप्ति का अनुभव किया, यह महत्वपूर्ण है। सकारात्मक सोच के अभाव में जीवन बोझ बन जाता है। सत्संग से, भगवदाश्रय से, महापुरुषों की सन्निधि से ही जीवन में विवेकशीलता एवं आंतरिक समझ का उदय होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *