आज का पंचांग : थाली में भोजन ही नहीं, सुख और दुःख भी बंटते हैं

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

कहते हैं सभी प्राणियों में अकेली गाय ऐसी है, जिसके चार पेट होते हैं। मनुष्यों का एक पेट होता है, लेकिन गहराई से देखें तो मनुष्य का पहला पेट उसका मन है। मन- विचार और स्मृति का भोजन खाता है। अति भोजन के कारण उसको भी डायरिया होता है, जिसका नाम डिप्रेशन है।

दूसरा पेट है, दिमाग। जितनी अधिक जानकारियां इसमें भर ली जाएंगी, इसको भी अपच होगा। तीसरा पेट वह है, जिसको हम पेट कहते हैं, जहां हम भोजन रखते हैं, उतारते हैं। समय आ गया है कि पेट में भी दिमाग रखा जाए। क्या खा रहे हैं, कितना पचा रहे हैं। क्योंकि अन्न हमारी जीवनशैली पर प्रभाव डालता है, यह बात विज्ञान से भी अच्छे से साबित हो गई है।

और अब तो मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि पेट का दिल तभी अच्छा रहता है, जब परिवार के साथ भोजन किया जाए। क्योंकि थाली में भोजन ही नहीं, सुख और दुःख भी बंटते हैं। किशोर उम्र की संतानें यदि घरवालों के साथ भोजन करें तो उनका डिप्रेशन दूर होता है। विज्ञान का यह शोध ऋषि-मुनियों की बात को प्रमाणित कर रहा है। इसलिए अन्न के मामले में अपने सारे पेटों पर ठीक से काम करिए।

आज का पंचांग

श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ |आज है हरियाली अमावस्या and अमावस्या|

आज अमावस्या तिथिनक्षत्र पुनर्वसु 04:43 PM तक उपरांत पुष्य | हर्षण योग 09:50 AM तक, उसके बाद वज्र योग | करण चतुष्पद 01:31 PM तक, बाद नाग 12:41 AM तक, बाद किस्तुघन | आज राहु काल का समय 02:12 PM – 03:51 PM है | आज 10:59 AM तक चन्द्रमा मिथुन उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष अमावस्या   – Jul 24 02:29 AM – Jul 25 12:40 AM
  2. शुक्ल पक्ष प्रतिपदा   – Jul 25 12:41 AM – Jul 25 11:23 PM

नक्षत्र

  1. पुनर्वसु – Jul 23 05:54 PM – Jul 24 04:43 PM
  2. पुष्य – Jul 24 04:43 PM – Jul 25 04:00 PM

आज का विचार

हर छोटा बदलाव बड़ी सफलता का हिस्सा होता है। कमज़ोर तब रुकते है जब वो थक जाते है और विजेता तब रुकते है जब वो जीत जाते है.!!


आज का भगवद् चिन्तन

शिव तत्व विचार

प्रेम की वास्तविक परिभाषा हमें भगवान शिव से सीखनी चाहिए। दुनिया वाले भी प्रेम करते हैं पर केवल उस वस्तु को जो उनके उपयोग की हो। अनुपयोगी अथवा बिना कारण किसी से यदि कोई प्रेम करता है तो वो भगवान शिव ही हैं इसलिए वो भूतभावन भी कहलाते हैं। भूत-प्रेतों से प्रेम करना अर्थात समाज में उन लोगों से भी प्रेम करना जो समाज द्वारा तिरस्कृत हों, समाज की नजरों में उपेक्षित हों।

भोलेनाथ जी का अपनत्व उनके लिए भी है,जो समाज की दृष्टि में अनुपयोगी बन चुके हों। भूतभावन भगवान शिव से हमें यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि समाज का चाहे कोई भी वर्ग अथवा चाहे कोई भी व्यक्ति क्यों न हो यदि आप उन्हें ज्यादा कुछ न दे सको तो कोई बात नहीं, कम से कम थोड़ा सा अपनत्व अवश्य दे दिया करो। प्राणीमात्र के प्रति प्रेम, सम्मान अथवा अपनत्व की भावना ही शिवत्व की अवधारणा है।

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