पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है दुर्गाष्टमी व्रत|
आज अष्टमी तिथि 12:15 AM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र शतभिषा 02:49 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा | व्याघात योग 11:05 AM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण विष्टि 12:28 PM तक, बाद बव 12:15 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 10:54 AM – 12:14 PM है | आज चन्द्रमा कुंभ राशि पर संचार करेगा |
द्वापर युग के समय मथुरा में कंस ने अपने ही पिता उग्रसेन को कारागार में डाल दिया और खुद राजा बन गया था। कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव से हुआ था, उस समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसका अंत करेगी। ये आकाशवाणी सुनते ही कंस ने अपनी बहन देवकी को मार डालना चाहता था, वसुदेव ने कंस को वचन दिया था कि जो भी संतान होगी, वे उसे स्वयं सौंप देंगे, लेकिन देवकी न मारे।
वसुदेव की बात मानकर कंस ने इन दोनों को कारागार में भेज दिया। वचन के अनुसार वसुदेव ने कंस को एक-एक करके छह संतानें सौंप दीं। कंस ने इन सभी संतानों का वध कर दिया। जब सातवीं संतान के जन्म का समय आया, तो स्वयं शेषनाग भगवान ने बलराम के रूप में अवतार लिया था। विष्णु जी ने योगमाया को आदेश दिया था कि देवकी के गर्भ से सातवीं संतान को निकालकर वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दो, ताकि कंस को लगे कि गर्भपात हो गया और सातवीं संतान का सुरक्षित जन्म हो सके।
योगमाया ने भगवान का आदेश पूरा किया। बलराम सुरक्षित रूप से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिए गए। कंस को ये भ्रम हुआ कि देवकी का सातवां गर्भ गिर गया है। फिर समय बीता, और जब आठवीं संतान के जन्म का समय आया, तब भगवान विष्णु स्वयं श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित होने वाले थे।
भगवान ने योगमाया से कहा कि अब मेरे अवतार का समय आ गया है। आप गोकुल में नंद बाबा की पत्नी यशोदा के गर्भ से जन्म लीजिए। जब मैं जन्म लूं, तब वसुदेव मुझे लेकर यशोदा के पास गोकुल आएंगे और मुझे वहां छोडकर तुम्हें यहां ले आएंगे। जब कंस आठवीं संतान को मारने के लिए आएगा, तब तुम उसके हाथ से मुक्त हो जाना।
कारागार में वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उस समय कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए, दरवाजे अपने आप खुल गए और यमुना नदी पार करते हुए वसुदेव ने बालकृष्ण को यशोदा के यहां पहुंचा दिया और यशोदा के पास से योगमाया को ले आए। सब कुछ भगवान की योजना के अनुसार हुआ।
जब कंस को आठवीं संतान के जन्म की खबर मिली, तो वह कारागार पहुंचा और बच्चे को मारने के लिए उसे उठाया, लेकिन वह बच्ची (योगमाया) उसके हाथ से छूट गई और आकाश में प्रकट होकर बोली, हे कंस। तेरा वध करने वाला जन्म ले चुका है और अब तू कुछ नहीं कर सकता।
श्रीकृष्ण की सीख
योजना से मिलती है सफलता
भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार के जन्म की योजना सटीक योजना बनाई थी। भगवान ने तय किया था कि किसका क्या कार्य होगा, कौन कहां जाएगा और कंस के लिए कैसे भ्रम पैदा होगा। भगवान ने संदेश दिया है कि बड़े लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हमें दूरदृष्टि और योजना बनाकर कार्य करना चाहिए।
सही व्यक्ति को सही काम सौंपना
भगवान ने योगमाया, वसुदेव और यशोदा, तीनों को उनकी क्षमता के अनुसार भूमिका दी थी। जब हम हर व्यक्ति की उसकी योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी देते हैं तो सफलता जरूर मिलती है।
संकट में धैर्य न छोड़ें
देवकी और वसुदेव वर्षों तक कारागार में थे, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया, भगवान पर अटूट विश्वास बनाए रखा। जीवन में कठिनाइयों के समय धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।
सही तालमेल बनाए रखें
भगवान की योजना में हर बात एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी- समय, स्थान, व्यक्ति और उद्देश्य, इन सभी के बीच सही तालमेल बनाए रखा। भगवान ने संदेश दिया है कि सफलता सही तालमेल बनाए रखने से मिलती है।