पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण | आज है हरियाली तीज
आज तृतीया तिथि 10:42 PM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र मघा 04:23 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी | वरीयान योग 03:13 AM तक, उसके बाद परिघ योग | करण तैतिल 10:37 AM तक, बाद गर 10:42 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 05:28 PM – 07:07 PM है | आज चन्द्रमा सिंह राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – श्रावण
तिथि
- शुक्ल पक्ष तृतीया – Jul 26 10:42 PM – Jul 27 10:42 PM
- शुक्ल पक्ष चतुर्थी – Jul 27 10:42 PM – Jul 28 11:24 PM
नक्षत्र
- मघा – Jul 26 03:52 PM – Jul 27 04:23 PM
- पूर्व फाल्गुनी – Jul 27 04:23 PM – Jul 28 05:35 PM
आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार
संग्रह से जीवन मूल्यवान नहीं बनता है। भगवान शिव इसलिए नहीं पूजे जाते कि उनके पास स्वर्ण भंडार भरे पड़े हैं अपितु इसलिए पूजे जाते हैं, कि स्वर्ण लंका का दान करने की सामर्थ्य रखने पर भी वो खुले आसमान के नीचे जीवन जीते हैं। त्याग की महिमा हमें भगवान शिव से सीखनी चाहिए। स्वयं माँ अन्नपूर्णा के स्वामी होने पर भी जो पकवान और मिष्ठान नहीं अपितु फल-फूल व पत्तों का रसपान कर अपना जीवन निर्वहन करते हैं।
परहित, परोपकार एवं परमार्थ भगवान शिव के जीवन का मूल है। भगवान शिव का त्याग हमें यह सन्देश देता है कि संग्रह आपको सुख साधन तो उपलब्ध करायेगा पर शांति अथवा प्रसन्नता कभी भी नहीं दे पायेगा। त्याग से भले ही बाहरी सुख न मिले पर भीतर की प्रसन्नता अवश्य मिल जाती है, यही सीख भगवान भोलेनाथ का पावन जीवन चरित्र हमें प्रदान करता है।