पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
इन दिनों धार्मिक गतिविधियां बहुत बढ़ गई हैं। समाज में साधु-संतों का आना-जाना, दिखना ज्यादा हो गया है। यदि आप सामान्य मनुष्य हैं तो जब किसी साधु को देखें तो उसका मूल्यांकन करने में सावधानी रखें। क्योंकि संत यदि सक्रिय दिखे तो उसे बेचैन मत समझना।
यह मत मान लेना कि वो भी तामसी वृत्ति में लगा है, रजोगुणी है। और संत निष्क्रिय दिखे तो उसे आलसी न मान लीजिए। हो सकता है उसके भीतर मौन और शांति घटी है। लेकिन हमारी आदत होती है कि हम जैसे होते हैं, वैसा ही दूसरे को देखने लगते हैं। ज्यादातर मौकों पर हम अपनी ही छवि दूसरों में डालकर देखते हैं।
दूसरे के व्यक्तित्व का निर्णय करते समय हम अपना ही फैलाव कर लेते हैं। तो चूंकि इस समय साधु-संतों का समाज में हस्तक्षेप, गतिविधियां बढ़ गई हैं, इसलिए जितनी समझ अन्य विषयों की रखी जाए, साधु-संतों के आचरण की भी रखी जाए।
भले ही उनको परखने में कोई कमी मत रखिए, लेकिन असली साधु-संतों का अपमान न करें। क्योंकि हो सकता है इस भूल के कारण एक अच्छा व्यक्ति हमारे जीवन से अकारण दूर चला जाएगा। साधु का संग हरि कृपा है।
आज का पंचांग
श्रावण कृष्ण पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़
आज अष्टमी तिथि 05:02 PM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र अश्विनी 02:14 AM तक उपरांत भरणी | सुकर्मा योग 06:48 AM तक, उसके बाद धृति योग 03:56 AM तक, उसके बाद शूल योग | करण बालव 06:07 AM तक, बाद कौलव 05:02 PM तक, बाद तैतिल 03:53 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 10:53 AM – 12:33 PM है | आज चन्द्रमा मेष राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – आषाढ़
तिथि
- कृष्ण पक्ष अष्टमी – Jul 17 07:09 PM – Jul 18 05:02 PM
- कृष्ण पक्ष नवमी – Jul 18 05:02 PM – Jul 19 02:42 PM
नक्षत्र
- अश्विनी – Jul 18 03:39 AM – Jul 19 02:14 AM
- भरणी – Jul 19 02:14 AM – Jul 20 12:37 AM
आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार
जहाँ शिव है, वहाँ नंदी भी हैं और जहाँ नंदीश्वर हैं, वहाँ शिवजी भी हैं। इसका सीधा सा अर्थ यही हुआ कि जहाँ धर्म है वहाँ शिव भी हैं अथवा तो जहाँ शिव हैं, वहीं धर्म भी है। शिवजी का वाहन वृषभ है। वृषभ को धर्म का स्वरूप कहा जाता है अर्थात् शिवजी धर्म की सवारी करते हैं। जीवन के उत्थान एवं मंगल के लिए हमारे जीवन में धर्म की बहुत बड़ी आवश्यकता है। पशु तब तक ही सही दिशा में चलता है जब तक उसके ऊपर लगाम होती है।
पशु को लगाम से एवं मनुष्य को धर्म से ही नियंत्रित किया जा सकता है। अपनी जीवन ऊर्जा का कब, कहाँ और किस रुप में उपयोग करना है, ये धर्म हमें सिखाता है। ज्ञानी व्यक्ति अनासक्त भाव से कर्म करने के कारण कर्म के बन्धन में नहीं फँसता। भगवान भोलेनाथ का जीवन हमें बताता है, कि जो भी करो, धर्म का अवलंबन लेकर ही करो, जिससे हमको कर्मबंधनों से मुक्ति मिल सके एवं यह मानव जीवन सफल हो सके।