आज का पंचांग : प्रभु से जुड़े रहें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ |

आज द्वादशी तिथि 11:10 PM तक उपरांत त्रयोदशी | नक्षत्र अनुराधा 01:11 AM तक उपरांत ज्येष्ठा | शुभ योग 10:02 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग | करण बव 10:16 AM तक, बाद बालव 11:10 PM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 07:31 AM – 09:11 AM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आषाढ़
  4. अमांत – आषाढ़

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष द्वादशी   – Jul 06 09:15 PM – Jul 07 11:10 PM
  2. शुक्ल पक्ष त्रयोदशी   – Jul 07 11:10 PM – Jul 09 12:38 AM

नक्षत्र

  1. अनुराधा – Jul 06 10:41 PM – Jul 08 01:11 AM
  2. ज्येष्ठा – Jul 08 01:11 AM – Jul 09 03:15 AM

आज का भगवद् चिन्तन

प्रभु से जुड़े रहें

इस मानव जीवन में प्रभु से भी कोई न कोई सम्बंध अवश्य स्थापित होना ही चाहिए। प्रभु तो बड़े दयालु एवं कृपालु हैं। जीव किसी भी भाव से एक बार उनकी शरण में आ जाए फिर उसके कल्याण में कोई संशय नहीं रह जाता है। जिस प्रकार गंगा जी में मिलते ही सामान्य जल भी गंगा जैसा पवित्र हो जाता है, ठीक इसी प्रकार जीव तभी तक अपवित्र है, जब तक वह ठाकुर जी से सम्बंध नहीं रखता है। ठाकुर जी से सम्बंध होते ही वो भी भगवद् स्वरूप ही हो जाता है।

शास्त्रों और महापुरुषों का मत है कि वैर से, द्वेष से, भय से, किसी कामना से अथवा प्रेम से किसी भी भाव से हमारा चित्त बस कैसे भी प्रभु में लग जाए।एक बार उनसे सम्बंध बन जाये तो फिर कल्याण होने में देर नहीं लगती। ठाकुर जी से कुछ न कुछ सम्बंध अवश्य बनाओ।अर्जुन की तरह मित्र नहीं बना सकते हो तो दुर्योधन की तरह शत्रु भी बना लोगे तो भी कल्याण निश्चित है।

प्रभात चिंतन

याचका: नैव याचन्ते
बोधयन्ति गृहे गृहे l
दीयतां दीयतां नित्यम्
अदातु: फलमीदृशम् ll

भावार्थ:- भिक्षुक सबके घर में सिर्फ भिक्षा मांगने नहीं आते बल्कि वह हमें ज्ञान देते हैं कि दे दो, दे दो ! नहीं देने का फल मेरे जैसे होगा। इस जन्म में नहीं दिया तो अगले जन्म में जरुर मेरी तरह तुम्हें भी भिक्षा मांगनी पड़ेगी।

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