पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |
आज प्रतिपदा तिथि 01:52 AM तक उपरांत द्वितीया | नक्षत्र आश्लेषा 10:47 PM तक उपरांत मघा | आयुष्मान योग 07:20 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग 04:45 AM तक, उसके बाद शोभन योग | करण बालव 02:42 PM तक, बाद कौलव 01:52 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 08:32 AM – 09:55 AM है | आज 10:47 PM तक चन्द्रमा कर्क उपरांत सिंह राशि पर संचार करेगा |
श्रीरामचरितमानस
————-परमार्थ——
जल भरि नयन कहहिं रघुराई ।
तात कर्म निज ते गति पाई ।
परहित बस जिन्ह के मन माहीं ।
तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं ।।
( अरण्यकांड :30/4-5)
राम राम बंधुओं, रावण से युद्ध करते हुए जटायु जी घायल पड़े हैं । राम जी सीताजी को खोजते हुए जटायु से मिलते हैं । राम जी जटायु से अपना शरीर बनाए रखने को कहते हैं । जटायु जी कहते हैं आपका दर्शन पाकर किसकी पूर्ति के लिए अब इस शरीर रखूँ । राम जी कहते हैं कि आपने मेरा दर्शन ( यह गति ) अपने श्रेष्ठ कर्मों के कारण पाई है । जिनके मन दूसरे का हित करने में लगे रहते हैं उनके लिए जग में कुछ भी दुर्लभ ( अप्राप्य )नहीं है ।
मित्रों, अपने ही हित के बारे में सोच कर हम बहुत कुछ नहीं पा सकते हैं परंतु दूसरे का हित कर हम बहुत कुछ पा सकते हैं ।अस्तु परहित में लगें ।परहित ही स्वहित है , परहित ही रामहित है अतएव जय जय राम
आज का भगवद् चिन्तन
हार में ही जीत है
अपनों को हराकर हम कभी नहीं जीत सकते अपितु अपनों से हारकर ही उनके हृदय को जीता जा सकता है। जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही तो समझदार है। वर्तमान समय में परिवारों की स्थिति बहुत ही विचारणीय हो गई है। आज घरों में सुनाने को सब तैयार हैं, लेकिन सुनने को कोई भी राजी नहीं है। रिश्तों की मजबूती के लिये हमें सुनाने की ही नहीं अपितु सुनने की आदत भी डालनी पड़ेगी।
अपने को सही सिद्ध करने की अपेक्षा परिवार की प्रसन्नता को बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। आज घर हो अथवा बाहर अपने अधिकारों का ज्ञान सबको है, लेकिन कर्तव्यों से सभी अनभिज्ञ बने हुए हैं। प्रतिफल की आकांक्षा से रहित होकर हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। जिन्दगी की खूबसूरती ये नहीं कि हम कितने खुश हैं अपितु ये है, कि हमसे कितने खुश हैं। अपनों से हारना ही तो जीवन की जीत सुनिश्चित करता है।