पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आज का विचार
मुस्कान मानव हृदय की मधुरता को दर्शाता है और शांति बुद्धि की परिपक्वता को, और दोनों का ही होना मनुष्य की संपूर्णता को बताता है.!
| तिथि | तृतीया – 02:38 पी एम तक | नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद – 08:07 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| चतुर्थी | रेवती | ||
| योग | साध्य – 06:23 पी एम तक | करण | गर – 02:38 पी एम तक |
| शुभ | वणिज – 01:51 ए एम, फरवरी 21 तक | ||
| वार | शुक्रवार | विष्टि | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 सिद्धार्थ | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | फाल्गुन – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 8 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मीन | नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 08:32 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | कुम्भ | उत्तर भाद्रपद – 02:20 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | शतभिषा | उत्तर भाद्रपद – 08:07 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | शतभिषा | रेवती – 01:53 ए एम, फरवरी 21 तक | |
| रेवती |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 21 मिनट्स 17 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 37 मिनट्स 48 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:46 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:24 ए एम से 06:15 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:49 ए एम से 07:05 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:23 पी एम से 01:09 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:40 पी एम से 03:25 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:24 पी एम से 06:50 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:27 पी एम से 07:42 पी एम |
| अमृत काल | 03:28 पी एम से 05:01 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:20 ए एम, फरवरी 21 से 01:11 ए एम, फरवरी 21 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 08:07 पी एम से 07:04 ए एम, फरवरी 21 | अमृत सिद्धि योग | 08:07 पी एम से 07:04 ए एम, फरवरी 21 |
| रवि योग | 08:07 पी एम से 07:04 ए एम, फरवरी 21 |
आज का भगवद् चिंतन
विश्वासपूर्ण संबंध
अविश्वास ही प्रेम को खंडित करता है, जिससे हमारे परस्पर संबंधों की मजबूत दीवारों में भी दरारें आ जाती हैं। विश्वास की ईंट जितनी मजबूत होगी हमारे संबंधों की दीवार भी उतनी ही टिकाऊ बन पायेगी।विश्वास ही तो संबंधों को प्रेमपूर्ण बनाये रखता है। जब हमारे द्वारा प्रत्येक बात का मूल्यांकन स्वयं की दृष्टि से किया जाता है तो वहाँ अविश्वास अवश्य उत्पन्न हो जाता है।
यह आवश्यक नहीं कि हर बार हमारे मूल्यांकन करने का दृष्टिकोण सही हो इसलिए संबंधों की मधुरता के लिए अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं तक पहुँचने का गुण भी हमारे भीतर अवश्य होना चाहिए। संबध जोड़ना महत्वपूर्ण नहीं अपितु संबंध निभाना महत्वपूर्ण है। संबंधों का जुड़ना संयोग हो सकता है पर संबंधों को निभाना जीवन की एक साधना ही है। संबधों की मजबूती के लिए परस्पर विश्वास ही प्रथम आवश्यक्ता है।