आज का पंचांग : संसार का सत्य

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

पञ्चाङ्ग
तिथिप्रतिपदा – 04:57 पी एम तकनक्षत्रशतभिषा – 09:16 पी एम तक
द्वितीयापूर्व भाद्रपद
योगशिव – 10:45 पी एम तककरणबव – 04:57 पी एम तक
सिद्धबालव – 04:31 ए एम, फरवरी 19 तक
वारबुधवारकौलव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
विक्रम सम्वत2082 कालयुक्तबृहस्पति संवत्सरकालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक
शक सम्वत1947 विश्वावसुसिद्धार्थी
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासफाल्गुन – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते6फाल्गुन – अमान्त
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिकुम्भनक्षत्र पदशतभिषा – 09:19 ए एम तक
सूर्य राशिकुम्भशतभिषा – 03:18 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रधनिष्ठाशतभिषा – 09:16 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदधनिष्ठापूर्व भाद्रपद – 03:12 ए एम, फरवरी 19 तक
  पूर्व भाद्रपद
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुशिशिरदिनमान11 घण्टे 16 मिनट्स 16 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान12 घण्टे 42 मिनट्स 49 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:35 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:15 ए एम से 06:06 ए एमप्रातः सन्ध्या05:41 ए एम से 06:57 ए एम
अभिजित मुहूर्तकोई नहींविजय मुहूर्त02:28 पी एम से 03:13 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:11 पी एम से 06:36 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:13 पी एम से 07:30 पी एम
अमृत काल02:04 पी एम से 03:40 पी एमनिशिता मुहूर्त12:09 ए एम, फरवरी 19 से 01:00 ए एम, फरवरी 19
अशुभ समय
राहुकाल12:35 पी एम से 02:00 पी एमयमगण्ड08:22 ए एम से 09:46 ए एम
आडल योग06:57 ए एम से 09:16 पी एमविडाल योग09:16 पी एम से 06:56 ए एम, फरवरी 19
गुलिक काल11:11 ए एम से 12:35 पी एमदुर्मुहूर्त12:13 पी एम से 12:58 पी एम
वर्ज्य03:33 ए एम, फरवरी 19 से 05:08 ए एम, फरवरी 19पञ्चकपूरे दिन
बाणचोर – 02:47 ए एम, फरवरी 19 से पूर्ण रात्रि तक  
आनन्दादि एवं तमिल योग
आनन्दादि योगमानस – 09:16 पी एम तकतमिल योगअमृत – 09:16 पी एम तक
पद्मसिद्ध
जीवनमनिर्जीव – 09:16 पी एम तकनेत्रमनेत्रहीन
अर्ध जीवन½  
निवास और शूल
होमाहुतिसूर्यदिशा शूलउत्तर
अग्निवासपाताल – 04:57 पी एम तकनक्षत्र शूलदक्षिण – 09:16 पी एम से पूर्ण रात्रि तक
पृथ्वी

आज का चिंतन

जो कार्य पुरुषार्थ करने पर पूरा न हो पाए तो उसे नियति का खेल मानकर सहज और तनाव मुक्त हो जाना चाहिए। याद रखना; किसी की अर्थी-यात्रा में जाओ तो ये मत समझना कि आप उसे उसकी मंजिल पर ले जा रहे हैं,,, बल्कि ये समझना कि अर्थी पर लेटा इंसान,,,, मुर्दा होकर भी हमें हमारी मंजिल दिखाने ले जा रहा है। इसलिए हम परंपरा और नियमों को वैज्ञानिकता के साथ स्वीकार करें, अंधानुकरण के रूप में नहीं.

आज का भगवद् चिंतन
संसार का सत्य

संसार अपना दिखता हुआ प्रतीत होते हुए भी अपना नहीं है और परमात्मा अपने से दूर प्रतीत होते हुए भी अपने सबसे निकट एवं सबसे बड़े हितैषी हैं। संसार का मायावी व्यवहार जितना शीघ्र समझ आ जायेगा उतनी शीघ्र आपकी बुद्धि परमात्मा की ओर लगने लगेगी। केवल सांसारिक बुद्धि से जीव का कल्याण कभी संभव नहीं हो सकता इसलिए संसार की परीक्षा भी करते रहना चाहिए। जितनी जल्दी संसार के सत्य को जान लोगे इससे मुक्त हो जाओगे क्योंकि जानना ही मुक्त होने का मार्ग भी है।

संसार की परीक्षा करते-करते समय-समय पर स्वयं का भी निरीक्षण करते रहें कि कहीं मैं अपने मार्ग से भटक तो नहीं रहा। भौतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि आपको स्वयं के द्वारा ही प्राप्त होगी। अज्ञानी व्यक्ति स्वयं के बजाय दूसरों के गुण-दोषों का चिंतन करते रहने के कारण अपने जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने से भी वंचित रह जाता है। संसार का त्याग नहीं अपितु संसार मेरा है, इस भावना का त्याग आपको प्रभु चरणों का प्रेमी बना देगा।

🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *