आज का पंचांग : स्वयं को समझें, स्वयं को बदलें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिन्तन
स्वयं को समझें, स्वयं को बदलें

स्वयं में बदलाव के बिना हमारा जीवन कभी नहीं बदल सकता है। हमारे जीवन में अशांति, अप्रसन्नता अथवा दु:खों का कारण कोई और नहीं अपितु हम स्वयं हैं। कई बार हमारे द्वारा अपनी अशांति, अपने दुःखों अथवा अपने द्वंदों का कारण दूसरों को मान लिया जाता है। हम जीवन में सुखी तो होना चाहते हैं पर दूसरों को बदल कर, स्वयं को बदल कर नहीं। हम अपनी ऊर्जा का उपयोग दूसरों को समझाने में करते हैं पर स्वयं को नहीं समझा पाते।

लोग हमें समझें अथवा न समझें पर हमारी समझ में अपना स्वयं का स्वभाव अवश्य आना चाहिए। दूसरे लोग हमें नहीं समझ रहे हैं, यह चिंता का विषय बिल्कुल भी नही है पर हम स्वयं भी अपने आप को नहीं समझ पा रहे हैं तो यह अवश्य विचारणीय विषय है। स्वयं को जानने का प्रयास करो। जो स्वयं को जान लेता है वो अपने जीवन में घटित हो रही बहुत सारी समस्याओं का समाधान भी स्वयं खोज लेता है। स्वयं को समझें और स्वयं को बदलें यही जीवन की प्रसन्नता का आधार है।

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:40 ए एमसूर्यास्त06:42 पी ए
चन्द्रोदय06:07 ए एम, मार्च 18चन्द्रास्त05:03 पी एम
पञ्चाङ्
तिथित्रयोदशी – 09:23 ए एम तकनक्षत्रशतभिषा – 06:09 ए एम, मार्च 18 तक
चतुर्दशीपूर्व भाद्रपद
योगसिद्ध – 08:15 ए एम तककरणवणिज – 09:23 ए एम तक
साध्य – 06:22 ए एम, मार्च 18 तकविष्टि – 08:59 पी एम तक
शुभशकुनि
वारमंगलवार  
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2082 कालयुक्तबृहस्पति संवत्सरकालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक
शक सम्वत1947 विश्वावसुसिद्धार्थी
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते3फाल्गुन – अमान्त
राजासूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिशनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीसूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिचन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिबुध – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिसूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिमंगल – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिबुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिशनि – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिकुम्भनक्षत्र पदशतभिषा – 12:22 पी एम तक
सूर्य राशिमीनशतभिषा – 06:20 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रपूर्व भाद्रपदशतभिषा – 12:16 ए एम, मार्च 18 तक
सूर्य नक्षत्र पदपूर्व भाद्रपदशतभिषा – 06:09 ए एम, मार्च 18 तक
  पूर्व भाद्रपद
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 01 मिनट 52 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान11 घण्टे 57 मिनट्स 00 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:41 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:04 ए एम से 05:52 ए एमप्रातः सन्ध्या05:28 ए एम से 06:40 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:17 पी एम से 01:05 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:39 पी एम से 07:03 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:42 पी एम से 07:53 पी एम
अमृत काल11:01 पी एम से 12:36 ए एम, मार्च 18निशिता मुहूर्त12:16 ए एम, मार्च 18 से 01:04 ए एम, मार्च 18

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