पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
आज का विचार
जो भी हम सोचते हैं उस पर हमेशा विश्वास नहीं करना चाहिए। बूढ़े लोग तभी बोझ लगते हैं जब उनकी सोच बूढ़ी हो जाती है। उम्र बढ़ना गलती नहीं, लेकिन अपनी ही बात को अंतिम सच मान लेना रिश्तों को कमजोर कर देता है। जो बुजुर्ग समय के साथ बदलते हैं, सुनना जानते हैं और नई सोच अपनाते हैं, वही घर की शान बनते हैं। बुढ़ापा नहीं, सोच को जवान रखना ही असली बुद्धिमानी है।
आज का भगवद् चिन्तन
मनोबल से विजय
मन से कभी भी हार मत मानना, नहीं तो आनंदमय जीवन भी दुखमय लगने लगेगा। जिसका मन हार जाता है फिर दुनिया की कोई शक्ति उसे नहीं जिता सकती। मन के हार जाने का अर्थ परिस्थितियों के आगे समर्पण कर देना है। मन के हार जाने का अर्थ युद्ध से पहले ही लड़े बिना अपनी पराजय को स्वीकार कर लेना है। जीवन के समर में मन के हारे हार है और मन के जीते ही जीत है।
जिसका मनोबल टूट जाता है, वो युद्ध से पहले ही पराजय स्वीकार कर लेता है। कुछ न होते हुए भी जिसके पास मनोबल है, वह आज नहीं तो कल ही सही, लेकिन एक दिन अवश्य विजयी होगा। किसी भी मनुष्य की वास्तविक शक्ति और सामर्थ्य तो उसका स्वयं का मनोबल ही है। जीवन का युद्ध अस्त्र-शस्त्र के बल पर नहीं अपितु मनोबल की शक्ति के बल पर जीता जाता है। जिसके पास मनोबल है, उसकी विजय भी निश्चित है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:39 ए एम | सूर्यास्त | 06:42 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | चन्द्रोदय नहीं | चन्द्रास्त | 06:03 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | चतुर्दशी – 08:25 ए एम तक | नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद – 05:21 ए एम, मार्च 19 तक |
|---|---|---|---|
| अमावस्या | उत्तर भाद्रपद | ||
| योग | शुभ – 04:01 ए एम, मार्च 19 तक | करण | शकुनि – 08:25 ए एम तक |
| शुक्ल | चतुष्पाद – 07:43 पी एम तक | ||
| वार | बुधवार | नाग | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 4 | फाल्गुन – अमान्त | |
| राजा | सूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | शनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | सूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | चन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | बुध – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | सूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | मंगल – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | बुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | शनि – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कुम्भ – 11:36 पी एम तक | नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद – 12:00 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| मीन | पूर्व भाद्रपद – 05:49 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मीन | पूर्व भाद्रपद – 11:36 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद – 09:27 ए एम तक | पूर्व भाद्रपद – 05:21 ए एम, मार्च 19 तक | |
| उत्तर भाद्रपद | उत्तर भाद्रपद | ||
| सूर्य नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद – 09:27 ए एम तक | ||
| उत्तर भाद्रपद |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 03 मिनट्स 32 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 11 घण्टे 55 मिनट्स 20 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:40 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:03 ए एम से 05:51 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:27 ए एम से 06:39 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:29 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:40 पी एम से 07:04 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:42 पी एम से 07:54 पी एम |
| अमृत काल | 09:37 पी एम से 11:10 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:16 ए एम, मार्च 19 से 01:04 ए एम, मार्च 19 |