आज का पंचांग : कहना नहीं, करना सीखें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज का चिंतन

प्राण देना प्रेम नही है, किसी के प्राण बन जाना ही प्रेम है। तुलना के खेल में नहीं उलझना है क्योंकि इस खेल का कहीं कोई अंत नहीं, जहाँ तुलना की शुरुआत होती है वहीं से आनंद और अपनापन खत्म होता।

आज का भगवद् चिन्तन
कहना नहीं, करना सीखें

कोरा उपदेश भी तब तक किसी काम का नहीं, जब तक उसे चरितार्थ न किया जाए। वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कई ज्यादा प्रभावी होते हैं। प्रत्येक सफल व्यक्तियों में एक बात की समानता मिलती है, कि उन्होंने केवल वाणी से नहीं अपितु अपने कार्यों से भी उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं।

हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधारशिला तो होनी ही चाहिए लेकिन पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके। महत्वपूर्ण ये नहीं कि हम अच्छा कह रहे हैं अपितु महत्वपूर्ण तो ये है, कि हम अच्छा कर रहे हैं। सृजनात्मकता जीवन की माँग ही नहीं अपितु अनिवार्यता भी है। इसलिए केवल अच्छा कहना नहीं अपितु अच्छा करना भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:36 ए एमसूर्यास्त07:26 पी एम
चन्द्रोदय12:01 ए एम, जून 07चन्द्रास्त10:25 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथिषष्ठी – 02:40 ए एम, जून 07 तकनक्षत्रश्रवण – 06:03 ए एम तक
सप्तमीधनिष्ठा
योगइन्द्र – 10:05 ए एम तककरणगर – 02:04 पी एम तक
वैधृतिवणिज – 02:40 ए एम, जून 07 तक
वारशनिवारविष्टि
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते23ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमकर – 07:03 पी एम तकनक्षत्र पदश्रवण – 06:03 ए एम तक
कुम्भधनिष्ठा – 12:34 पी एम तक
सूर्य राशिवृषभधनिष्ठा – 07:03 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररोहिणीधनिष्ठा – 01:30 ए एम, जून 07 तक
सूर्य नक्षत्र पदरोहिणीधनिष्ठा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 49 मिनट्स 46 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 10 मिनट्स 09 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:55 ए एमप्रातः सन्ध्या04:35 ए एम से 05:36 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:03 पी एम से 12:59 पी एमविजय मुहूर्त02:49 पी एम से 03:45 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:24 पी एम से 07:45 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:26 पी एम से 08:27 पी एम
अमृत काल08:43 पी एम से 10:26 पी एमनिशिता मुहूर्त12:11 ए एम, जून 07 से 12:51 ए एम, जून 07
द्विपुष्कर योग02:40 ए एम, जून 07 से 05:36 ए एम, जून 07सर्वार्थ सिद्धि योग05:36 ए एम से 06:03 ए एम
रवि योग06:03 ए एम से 05:36 ए एम, जून 07