पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
धर्ममय जीवन
जब धर्म किसी व्यक्ति के जीवन में आता है तो वह अपने साथ उदारता व विनम्रता जैसे अनेक सद्गुणों को लेकर आता है। विनम्रता धर्म की अनिवार्यता नहीं अपितु धर्म का स्वभाव है। धर्म के साथ विनम्रता ऐसे ही सहज चली आती है, जैसे फूलों के साथ सुगंध और दीये के साथ प्रकाश। धन और धर्म दोनों ही व्यक्ति की चाल को बदल देते हैं। जब धन होता है तो व्यक्ति अकड़ कर चलता है और जब धर्म होता है तो वह विनम्र होकर चलने लगता है।
जीवन में संपत्ति आती है तो मनुष्य कौरवों की तरह अभिमानी हो जाता है और जीवन में सन्मति आती है तो मनुष्य पाण्डवों की तरह विनम्र भी बन जाता है। संपत्ति आने के बावजूद भी जो उस संपत्ति रूपी लक्ष्मी को उन प्रभु श्री नारायण की चरणदासी समझकर उसका सदुपयोग करते हुए अपने जीवन को विनम्र भाव से जीते हैं, सचमुच इस कलिकाल में उनसे श्रेष्ठ कोई साधक नहीं हो सकता। धर्म का आश्रय जीवन को उदार भी बना देता है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | चतुर्थी – पूर्ण रात्रि तक | नक्षत्र | ज्येष्ठा – 12:55 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| योग | शिव – 12:17 ए एम, मई 06 तक | मूल | |
| सिद्ध | करण | बव – 06:37 पी एम तक | |
| वार | मंगलवार | बालव – पूर्ण रात्रि तक | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 22 | वैशाख – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृश्चिक – 12:55 पी एम तक | नक्षत्र पद | ज्येष्ठा – 06:10 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| धनु | ज्येष्ठा – 12:55 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मेष | मूल – 07:39 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | भरणी | मूल – 02:24 ए एम, मई 06 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | भरणी | मूल |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 18 मिनट्स 26 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 10 घण्टे 40 मिनट्स 48 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:24 ए एम से 05:07 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:46 ए एम से 05:50 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:56 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:42 पी एम से 03:35 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:07 पी एम से 07:28 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:08 पी एम से 08:12 पी एम |
| निशिता मुहूर्त | 12:07 ए एम, मई 06 से 12:50 ए एम, मई 06 |