स्मार्ट सिटी के काम में तालमेल की कमी

दून स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहरभर में खुदी हुई हैं सड़कें

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देहरादून:  राजधानी में चल रहे स्मार्ट सिटी के काम से आम जनता ही नहीं बल्कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी परेशान हो गये हैं। सड़कों की बदहाली और जनता की परेशानी के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना और लोक निर्माण विभाग के बीच आपसी समन्वय की कमी मानी जा रही है जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

ऐसा ही हाल इन दिनों सुभाष रोड, क्रॉस रोड और न्यू रोड का है। यहां पर सड़क खुदनी शुरू होती है तो लोगों का बेहद मुश्किल समय शुरू हो जाता है। हालांकि स्मार्ट सिटी परियोजना के जो काम आज दुखदायी साबित हो रहे हैं, आने वाले कुछ वर्षों में इसके अच्छे परिणाम दिखाई देंगे।

वार्ड 21 एमकेपी के पार्षद रोहन चंदेल का कहना है कि स्मार्ट सिटी के काम के चलते जनता को परेशानी हो रही है। स्मार्ट सिटी का काम शुरू हुए लगभग एक वर्ष हो चुका है।

सुभाष रोड पर ऐसा देखने में आ रहा है कि पीडब्ल्यूडी सड़क बना रहा है तो पीछे से स्मार्ट सिटी के काम के लिए फिर से सड़क को खोद दिया जा रहा है। इस तरह से दोनों विभागों में समन्वय की कमी देखी जा रही है।

क्योंकि यदि पीडब्ल्यूडी विभाग सड़क बना रहा है तो उससे पहले स्मार्ट सिटी परियोजना को भी अवगत कराया जाता है ताकि वहां कोई काम छूटा हुआ है तो उसको समय से पूरा कर लिया जाए।

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लेकिन सुभाष रोड में चल रहे काम को देख कर ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है कि विभाग आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। इसी तरह से क्रॉस रोड और न्यू रोड का भी हाल हैं। सुभाष रोड को बनाने का काम शुरू हुआ तो परियोजना के काम के तहत एमकेपी चैक को फिर से खोद दिया गया है।

पार्षद ने बताया कि पीडब्ल्यूडी का कहना है कि विभाग द्वारा एक बार रोड बना दी जाती है तो स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों द्वारा रोड को फिर से खुदवा दिया जाता है।

विभाग के पास इतना बजट नहीं है कि बारकृबार रोड बनवा दी जाए। उन्होंने कहा कि इन विभागों और अधिकारियों की तालमेल की कमी के कारण दिक्कत जनता को झेलनी पड़ रही है। पीडब्ल्यूडी आगे से सड़क बना रहा तो स्मार्ट सिटी वाले इसे खोद दे रहे हैं।

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इस तरह से सड़क बन ही नहीं पाएगी और जनता को परेशानी उठानी पड़ेगी। पीडब्ल्यूडी द्वारा रोड में पैच लगा कर काम के लिए छोड़ा जा रहा है तो उस समय काम नहीं हो रहा है लेकिन पूरी रोड बनाई जा रही है तो खोदने के लिए दूसरा विभाग आ जाता है। इसी तरह से सीवर की सबसे बड़ी समस्या है और इस समस्या का पहले समाधान किया जाना चाहिए।