आज का पंचांग : शुभ श्रावण मास

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

स्वस्ति श्री पराभव संवत्सर, दक्षिणायन, ग्रीष्म ऋतु, आषाढ़ मास
(पूर्णिमान्त: पराभव संवत्सर, वर्षा ऋतु, श्रावण मास)

🌅 सूर्योदय सुबह 5:45🌇 सूर्यास्त रात 7:04
संकल्प तिथि
कृष्ण-षष्ठी
श्राद्ध तिथि
अमान्त: आषाढ़ कृष्ण-षष्ठी
पूर्णिमान्त: श्रावण कृष्ण-षष्ठी
तिथिकृष्ण-षष्ठी आज (04) रात 10:03 तक, फिर कृष्ण-सप्तमी
सप्ताह का दिनमंगलवार (भौमवासरः)
नक्षत्ररेवती आज (04) रात 9:54 तक, फिर अश्विनी
योगधृति आज (04) रात 7:33 तक, फिर शूल
करणगरिज आज (04) सुबह 10:33 तक, फिर वणिज आज (04) रात 10:03 तक
राशिमीन राशि 02/08/2026, दोपहर 3:27 से  04/08/2026, रात 9:54 तक

🚫 अशुभ समय

राहुकाल:
दोपहर 3:44 से शाम 5:24 तक

दुर्मुहूर्त:
सुबह 8:25 से सुबह 9:18 और रात 11:21 से रात 12:04 तक

वर्ज्य:
आज (04) सुबह 9:57 से आज (04) सुबह 11:33 तक

✅ शुभ समय

अमृत घटी:
आज (04) रात 7:30 से आज (04) रात 9:06 तक

अभिजीत:
सुबह 11:58-दोपहर 12:51

ब्रह्म मुहूर्त:
सुबह 4:20-सुबह 5:03

आज का भगवद् चिन्तन
शुभ श्रावण मास

श्रावण मास अर्थात् भूतभावन भगवान महादेव की आराधना का पावन मास भगवान महादेव को अतिप्रिय उसी श्रावण मास का प्रारम्भ हो चुका है। इस धरती पर भगवान शिव जैसा कृपालु, दयालु कोई दूसरा देव नहीं है।जल, दूध, वेलपत्र, प्रणाम मात्र से ही ये प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान कर देते हैं। भगवान महादेव स्वयं अभाव में रहते हुए भी भक्तों के अभावों को हरने वाले हैं।

आशुतोष भगवान महादेव की अल्प आराधना भी रंक को राजा बना देती है। इस पावन श्रावण मास में भगवान महादेव का अर्चन करके अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बनाने का सौभाग्य हम सबको अवश्य प्राप्त करना चाहिए।भूतभावन भगवान महादेव से समस्त विश्व के मंगल एवं कल्याण की कामना करते हुए प्राणीमात्र पर आपकी कृपा दृष्टि बनी रहे ऐसी साम्ब सदाशिव प्रभु के श्री चरणों में प्रार्थना करते हैं।

आज का विचार

जब लक्ष्यों को पाना मुश्किल हो तो लक्ष्यों को न बदले, बल्कि अपने प्रयासों में बदलाव करे। छोटी छोटी खुशियां ही तो जीने का सहारा बनती है, ख्वाहिशों का क्या है पल-पल बदलती है.!