पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है. ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
भाद्रपद शुक्ल पक्ष षष्ठी, रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, भाद्रपद. आज है विश्वकर्मा जयंती, षष्टी और कन्या संक्रांति.
आज षष्ठी तिथि 10:48 AM तक उपरांत सप्तमी. नक्षत्र अनुराधा 07:53 PM तक उपरांत ज्येष्ठा. विष्कुम्भ योग 12:49 PM तक, उसके बाद प्रीति योग. करण तैतिल 10:48 AM तक, बाद गर 11:52 PM तक, बाद वणिज. आज राहु काल का समय 01:52 PM – 03:23 PM है. आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा.
संबंधों को भी समय दीजिए
जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर उन रिश्तों को समय देना भूल जाते हैं, जिनके बिना हमारा जीवन अधूरा है। हम संसार को प्रभावित करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनों के मन को समझने, उनकी खामोशी सुनने और उनकी उपस्थिति को महसूस करने का समय ही नहीं निकाल पाते। धीरे-धीरे संबंधों के बीच दूरियाँ बढ़ने लगती हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि अपनापन कब औपचारिकता में बदल गया।
मधुर और टिकाऊ संबंध अपने प्रभाव से नहीं, बल्कि अपनी परवाह से बनते हैं। संबंध बनाना कठिन नहीं, उन्हें निरंतर प्रेम, विश्वास और समर्पण के साथ निभाना कठिन अवश्य है। किसी के जीवन में अपनी जगह बना लेना एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उस जगह को सम्मान और संवेदनशीलता से बनाए रखना ही संबंधों की वास्तविक परीक्षा है।
अपनापन वह अदृश्य चुंबक है, जो केवल अपनों को ही नहीं, बल्कि अपरिचित हृदयों को भी अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति रखता है। एक संवेदनशील व्यवहार, एक स्नेहपूर्ण मुस्कान और किसी के लिए निकाला गया थोड़ा-सा समय, कभी-कभी उस टूटते हुए विश्वास को फिर से जोड़ सकता है, जिसे वर्षों की उपेक्षा ने कमजोर कर दिया हो।
आज हमारे अनेक संबंध किसी बड़े विवाद के कारण नहीं, बल्कि समय न देने और परवाह न करने के कारण मृतप्राय हो रहे हैं। हम एक ही घर में रहकर भी एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। बातचीत के लिए समय नहीं, लेकिन दुनिया से जुड़े रहने के लिए अनगिनत साधन हमारे पास हैं। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने संबंधों को अपनी प्राथमिकताओं में फिर से स्थान दें।
किसी रिश्ते को जीवित रखने के लिए हर दिन लंबी बातचीत आवश्यक नहीं, लेकिन समय-समय पर सच्चे मन से एक-दूसरे के लिए उपस्थित होना आवश्यक है। रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ होने से गहरे बनते हैं।
याद रखिए—
अपनेपन से संबंध बनते हैं, परवाह से संबंध निभते हैं और समय देने से संबंध जीवनभर जीवंत बने रहते हैं।
इसलिए जीवन की व्यस्तताओं के बीच अपने लोगों के लिए समय निकालिए। उनके साथ बैठिए, उनकी बातें सुनिए, उनकी चिंताओं को समझिए और उन्हें यह अनुभव कराइए कि वे आपके जीवन में महत्त्व रखते हैं।
क्योंकि जब जीवन की संध्या आएगी, तब उपलब्धियों की लंबी सूची से अधिक मूल्यवान वे संबंध होंगे, जिनमें प्रेम था, विश्वास था और एक-दूसरे के लिए निकाला गया वह थोड़ा-सा समय था।
रिश्तों को केवल याद मत रखिए, उन्हें समय दीजिए। परवाह कीजिए। अपनापन दीजिए। यही जीवन की सबसे सुंदर साधना है।