सुप्रभातम्: महाभारत युद्ध के बाद क्यों जल गया था अर्जुन का रथ ?

  • महाभारत में अर्जुन के रथ की भी है बेहद दिलचस्प कहानी
  • अर्जुन को अग्नि देव की ओर से मिला था 4 घोड़ों वाला दिव्य रथ
  • अर्जुन के रथ के ऊपर पताका में स्वयं हनुमान जी विराजमान थे

हिमशिखर धर्म डेस्क

Uttarakhand

महाभारत का युद्ध अपनों के बीच हुआ था और यही कारण है कि अर्जुन कई बार इस युद्ध के दौरान मोह में फंसते रहे थे और यही कारण था कि भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश दिया था। गीता से मिले ज्ञान के आधार पर ही अर्जुन ने अपने कर्म पर ध्यान दिया और युद्ध में अपने गुरु द्रोणाचार्य, पितामह भीष्म और अपने सगों से भिड़ गए थे। महाभारत में दोनों ओर से भीषण युद्ध हुआ था।

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का रथ संचालन किया था और पूरे युद्ध के दौरान वह उनके सारथी बने रहे, लेकिन महाभारत के खत्म होते ही जब अर्जुन और श्रीकृष्ण रथ से उतरे तो उनका रथ तुरंत ही जल गया। इस रथ के जलने का कारण अर्जुन को भी नहीं पता था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण सब जानते थे। आखिर ऐसा क्यों हुआ, आइए इसके बारे में बताएं।

अर्जुन महाभारत युद्ध के खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण से सर्वप्रथम उतरने का आग्रह किया था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वे पहले उतरें। क्यों कि भगवान को पता था कि जब तक भगवान वे रथ पर रहेंगे रथ सही सलामत रहेगा और उनके उतरते ही रथ जल जाएगा। अर्जुन के रथ से उतरने के बाद भगवान ने जैसे ही धरती पर अपने दोनों कदम रखे रथ जल गया।

Uttarakhand Uttarakhand

यह देख अर्जुन बहुत ही विस्मित हुए और भगवान से पूछा कि आखिर उनका रथ जला क्यों, तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया की पार्थ, तुम्हारा रथ तो महाभारत के युद्ध के समय ही भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण के दिव्यास्त्रों के प्रहारों से पहले ही खत्म हो चुका था, लेकिन इस रथ पर हनुमानजी विराजित थे, मैं स्वयं इसका सारथी था। साथ ही ये रथ सिर्फ मेरे संकल्प की वजह से चल रहा था। अब इस रथ का काम पूरा हो चुका है। इसीलिए मैंने ये रथ छोड़ दिया और ये जल गया।

बता दें कि महाभारत शुरू होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि वह हनुमान जी की पूजा करे और उनसे प्रार्थना करें कि वह उनके रथ पर लगे ध्वज पर विराजमान हो जाएं। इसके बाद अर्जुन ने हनुमान जी से आग्रह किया था और हनुमान जी उनके रथ के ध्वजा पर विराजमान हो गए थे। यही कारण था कि महाभारत के युद्ध के दौरा अर्जुन का पितामाह भीष्म और कर्ण सहित कई योद्धाओं से युद्ध हुआ लेकिन उसने रथ को क्षति नहीं पहुंची थी।

Uttarakhand UttarakhandUttarakhand

यही कारण था कि जैसे ही श्रीकृष्ण भी रथ उतरे तो शेषनाग पाताल लोक चले गए और हनुमानजी रथ के ऊपर से अंतर्ध्यान हो गए और रथ में आग लग गई।