आज का पंचांग : शिव तत्व विचार

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण |आज है षष्टी

आज षष्ठी तिथि 02:41 AM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र हस्त 09:53 PM तक उपरांत चित्रा | सिद्ध योग 03:40 AM तक, उसके बाद साध्य योग | करण कौलव 01:41 PM तक, बाद तैतिल 02:42 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 12:33 PM – 02:11 PM है | आज चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – श्रावण
  4. अमांत – श्रावण

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष षष्ठी   – Jul 30 12:46 AM – Jul 31 02:41 AM
  2. शुक्ल पक्ष सप्तमी   – Jul 31 02:41 AM – Aug 01 04:58 AM

नक्षत्र

  1. हस्त – Jul 29 07:27 PM – Jul 30 09:53 PM
  2. चित्रा – Jul 30 09:53 PM – Aug 01 12:41 AM

प्रबंधन की दुनिया में कहा जाता है कि अपने कार्य को प्रेम करें। जो काम करें, डूबकर करें तो सफलता भी मिलेगी और आप बेचैन भी नहीं होंगे। करियर में एक्स्ट्रा माइलेज लेना हो तो एक काम और करें- खुद को रिचार्ज करें। और खुद को रिचार्ज तब ही कर पाएंगे जब आप ये समझेंगे कि हम एक आत्मा हैं, अभी इस शरीर में है।

चूंकि हम शरीर से करते कुछ और हैं, दिखते कुछ और हैं, होते कुछ और हैं। लेकिन जैसे ही आत्मा पर जाएंगे, हम जो हैं वो हो जाएंगे। और ठीक ढंग से रिचार्ज होना इसी को कहते हैं। तब आप अपने काम से प्रेम कर पाएंगे, क्योंकि आप आत्मा पर टिके हुए हैं। शरीर वाले लोग तो दोहरा जीवन जीते हैं।

जो लोग सिर्फ शरीर पर टिकते हैं, वो तुलसी पर दीया तो जलाते हैं पर बुझे दिल के होते हैं। खुद थकान से भरे हैं पर उत्साह से आरती उतारते हैं। तो ऐसे में तो रिचार्ज नहीं हो पाएंगे। इसलिए यदि खूब सफल होना है, सर्वोत्तम बनना है तो आत्मा को स्पर्श करना सीखिए। जिसका सरल तरीका है योग जरूर करें, चाहे कितने भी व्यस्त हों।

आज का भगवद् चिन्तन

शिव तत्व विचार

जीवन प्रतिपल एक नईं चुनौती प्रस्तुत करता है लेकिन जो इन सभी प्रतिकूलताओं अथवा अनुकूलताओं को समभाव से स्वीकार कर लेता है, वही जीवन महान भी बन पाता है। भगवान भोलेनाथ के जीवन की यह सीख बड़ी ही अद्भुत है कि कभी दूध मिला तो प्रसन्न हो गये व कभी केवल पानी ही मिला तो भी प्रसन्न हो गये। कभी शहद अर्पित हुआ तो प्रसन्न हो गये और कभी धतूरा ही मिला तो सहर्ष स्वीकार कर लिया।

केवल एक विल्व पत्र पर रीझने वाले भगवान भोले नाथ जीव को यह सीख देना चाहते हैं, कि आवश्यक नहीं कि हर बार उतना ही मिलेगा जितनी आपकी अपेक्षा है। कभी-कभी कम मिलने पर भी अथवा जो मिले, जब मिले और जितना मिले उसी में संतुष्ट रहना तो सीखो, तुम आशुतोष बनकर अवश्य पूजे जाओगे।

आज का विचार

मोमबत्ती को भी आख़िर में, उसके अंत पे पता चलता है कि उसको उस धागे ने ख़त्म किया जिसे वह सदा अपने सीने में , दिल में छुपाये रखी।

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