पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
जीवन में दुःख आना और दु:खी हो जाना, ये दो अलग बातें हैं। ऐसा कोई दुःख बना ही नहीं, जो बिना सुख के आए और ऐसा कोई सुख नहीं बना, जो बिना दुःख के आए। ये दोनों एक साथ ही आते हैं। इनकी समझ का नाम ही इनकी मुक्ति है। एक शब्द है- स्पेस।
इसका सीधा अर्थ होता है जगह बनाइए। हमारी भावनाओं में, हमारे विचार में एक स्पेस रखिए। विचार बाहर से आते हैं, सोच रहे होते हैं हम। फिर हम उस विचार से अपने पूरे व्यक्तित्व, अस्तित्व को जोड़ लेते हैं।
ऋषि-मुनि कह गए हैं कि मनुष्य के शरीर और आत्मा को चिपकाने का काम मन करता है और जिसके शरीर और आत्मा जितने अधिक चिपके, वो उतना अशांत। जरा-सा मन को हटाइए, आत्मा शरीर में स्पेस आया और यहीं से हम शांत हुए। और मन केवल संकल्प से नहीं गिरता, इसे नियंत्रित करने की कोई औषधि भी नहीं है।
मन का संचालन सांस से होता है। यदि प्राणायाम को प्रतिदिन बहुत गम्भीरता से लें, नियमित करें तो हमारी मन पर पकड़ बन जाएगी। और जब-जब हम मन को हटा देंगे, तब-तब वह स्पेस क्रिएट हो जाएगी, जो हमें शांत करती है।
बालाजी मंदिर
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:36 ए एम | सूर्यास्त | 07:29 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 04:22 ए एम, जून 14 | चन्द्रास्त | 05:40 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | त्रयोदशी – 04:07 पी एम तक | नक्षत्र | कृत्तिका – 01:16 ए एम, जून 14 तक |
|---|---|---|---|
| चतुर्दशी | रोहिणी | ||
| योग | सुकर्मा – 05:28 पी एम तक | करण | गर – 05:55 ए एम तक |
| धृति | वणिज – 04:07 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | विष्टि – 02:15 ए एम, जून 14 तक | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | शकुनि |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 30 | ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मेष – 09:25 ए एम तक | नक्षत्र पद | कृत्तिका – 09:25 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| वृषभ | कृत्तिका – 02:43 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | वृषभ | कृत्तिका – 08:00 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | मृगशिरा | कृत्तिका – 01:16 ए एम, जून 14 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | मृगशिरा | रोहिणी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 52 मिनट्स 38 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 07 मिनट्स 25 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:32 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:15 ए एम से 04:55 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:35 ए एम से 05:36 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:05 पी एम से 01:00 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:51 पी एम से 03:47 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:27 पी एम से 07:48 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:29 पी एम से 08:29 पी एम |
| अमृत काल | 11:09 पी एम से 12:34 ए एम, जून 14 | निशिता मुहूर्त | 12:12 ए एम, जून 14 से 12:53 ए एम, जून 14 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 01:16 ए एम, जून 14 से 05:36 ए एम, जून 14 | अमृत सिद्धि योग | 01:16 ए एम, जून 14 से 05:36 ए एम, जून 14 |