पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है। आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद | आज है सत्य व्रत, सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, भाद्रपद पूर्णिमा|
आज पूर्णिमा तिथि 11:38 PM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र शतभिषा 09:41 PM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा | सुकर्मा योग 09:22 AM तक, उसके बाद धृति योग | करण विष्टि 12:43 PM तक, बाद बव 11:38 PM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 05:02 PM – 06:34 PM है | आज चन्द्रमा कुंभ राशि पर संचार करेगा |
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – भाद्रपद
तिथि
- शुक्ल पक्ष पूर्णिमा – Sep 07 01:41 AM – Sep 07 11:38 PM
- कृष्ण पक्ष प्रतिपदा – Sep 07 11:38 PM – Sep 08 09:12 PM
नक्षत्र
- शतभिषा – Sep 06 10:55 PM – Sep 07 09:41 PM
- पूर्वभाद्रपदा – Sep 07 09:41 PM – Sep 08 08:02 PM
आज का विचार
सफलता के लिए हमारे स्वप्न विशाल होने चाहिए। हमारी महत्वकांक्षा उंची होनी चाहिए। हमारी प्रतिबद्धता गहरी होनी चाहिए और हमारे प्रयत्न बड़े होने चाहिए.!!_
आज का भगवद् चिंतन
श्रद्धा ही श्राद्ध है
अपने पूर्वजों, अपने पितरों के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करने की क्रिया का नाम ही “श्राद्ध” है। हमारे पूर्वज, अपने माता-पिता में, अपने बडों में अथवा पारिवारिक जनों में इतनी श्रद्धा रखते थे कि उनके मरने के बाद भी उनकी स्मृति और सम्मान में यथायोग्य दान-पुण्य, सत्कर्म किया करते थे। अपने पितरों के प्रति यही श्रद्धांजलि ही कालांतर में “श्राद्ध” कर्म के रूप में मनाई जाने लगी।
वर्तमान परिस्थितियों में इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारी श्रद्धा मृत माता-पिता में तो होनी ही चाहिए लेकिन उससे महत्वपूर्ण यह है, कि मूर्त माता-पिता में भी हमारी श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा वही फलदायी होती है जो जीवित माँ-बाप के प्रति हो अन्यथा उनके मरने के बाद किया जाने वाला श्राद्ध एक आत्मप्रवंचना से ज्यादा कुछ नहीं होगा।
जो मूर्त माँ-बाप के प्रति श्रद्धा रखता है, वही मृत माँ-बाप के प्रति “श्राद्ध” कर्म करने का सच्चा अधिकारी भी बन जाता है। श्राद्ध के इन दिवसों में हम अपने पूर्वजों का तो स्मरण करें ही, साथ ही आजीवन अपने घर में माता-पिता व बडों की श्रद्धापूर्वक सेवा भी व सम्मान भी अवश्य करें।