माँ चंद्रघंटा नमोऽस्तुते : तृतीया तिथि आज और कल दो दिन रहेगी

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

नवरात्री का तीसरा दिन बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस बार आज 24 और 25 सिंतबर, यानी तृतीया तिथि दो दिन रहने वाली है। इस खास अवसर पर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। भागवत पुराण में माता के इस रूप को बेहद सौम्य और शांत बताया गया है, जो सुख-समृद्धि देने वाली हैं। चंद्रघंटा माता की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जातक के सुखों में वृद्धि होती है और समाज में सम्मान भी बढ़ता है। इस दिन माता के इस सरल, सौम्य और शांत रूप की पूजा करने से आत्मविश्वास और भौतिक सुखों में वृद्धि होती है।

माता चंद्रघंटा का स्वरूप
देवी का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा हैं। इनके मस्तक पर एक घंटे के आकार का चंद्रमा है। इसी के चलते माता का नाम चंद्रघंटा पड़ा। इस नाम में एक अद्वितीय तेज और ममता समाहित है। मां चंद्रघंटा का रूप बेहद भव्य और अलौकिक है, जो शांतिपूर्ण है। साथ ही उनकी शक्ति भी अद्वितीय है। मां चंद्रघंटा हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि प्रदान कराने वाली हैं। इनकी पूजा करने से जीवन में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में तृतीया तिथि पर विशेष रूप से देवी की पूजा सूर्योदय से पहले करनी चाहिए। इस समय मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चंद्रघंटा माता की पूजा में लाल और पीले रंग के गेंदे के फूल अर्पित करने का महत्व होता है। इन पुष्पों को देवी की ममता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

माता चंद्रघंटा पूजा विधि
नवरात्रि के तीसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, माता की मूर्ति को लाल या पीले रंग के वस्त्र पर रखें और उन्हें कुमकुम, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। मां चंद्रघंटा की पूजा में पीले रंग के पुष्पों और वस्त्रों का प्रयोग करने का विशेष महत्व होता है। देवी को पीले रंग की मिठाई और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। साथ ही, पूजा के समय माता के मंत्रों का भी जाप करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिसका पाठ करने के बाद विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की आरती करनी चाहिए।

मां चंद्रघंटा को लगाएं इन चीजों का भोग
माना जाता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा को पूजा में खीर का भोग लगाना सबसे उत्तम होता है। ऐसे में उन्हें केसर वाली खीर जरूर चढ़ाएं। साथ ही, लौंग, पंचमेवा, इलायची और दूध से बनी मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा, आप मिसरी और पेड़े भी चढ़ा सकते हैं।

मां चंद्रघंटा का मंत्र
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता,
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।
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वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्,
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्।
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मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्,
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला, वराभीतकराम्।

मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम,
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती,
चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली,
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो,
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
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सुंदर भाव को लाने वाली,
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये,
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं,
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता,
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा,
करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटू महारानी,
भक्त की रक्षा करो भवानी।

आज का विचार

उस काम का चयन कीजिये जिसे आप पसंद करते हैं, फिर आपको पूरी ज़िन्दगी एक दिन भी काम नहीं करना पड़ेगा। बड़ा सोचो, जल्दी सोचो, आगे सोचो, विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है.!

आज का भगवद् चिन्तन
माँ चंद्रघंटा नमोऽस्तुते

अपने शरणागत की दुर्गति का नाश कर उसको सद्गति प्रदान करने वाली शक्ति का नाम ही दुर्गा है इसीलिए ‘दुर्गा दुर्गति नाशिनी’ भी कहा गया है। दुर्गा शक्ति की उत्पत्ति के पीछे भी बहुत से कारण हैं तथापि मुख्यतः जगत जननी माँ जगदम्बा द्वारा दुर्गम नामक असुर का नाश करने के कारण ही उनका नाम ‘दुर्गा’ पड़ा।

दुर्गम अर्थात जिस तक पहुंचना आसान काम नहीं अथवा जिसका नाश करना हमारी सामर्थ्य से बाहर हो। मनुष्य के भीतर छुपे यह काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे दुर्गुण ही तो दुर्गम असुर हैं जिनका नाश करना आसान तो नहीं लेकिन माँ की कृपा से असंभव भी नहीं है।

नारी के भीतर छुपे स्वाभिमान व सामर्थ्य का प्राकट्य ही ‘दुर्गा’ है। परम शक्ति सम्पन्न व परम वन्दनीय होने पर भी जब-जब समाज में नारी के प्रति एक तिरस्कृत भाव रखा जाएगा, तब- तब नारी द्वारा अपने शक्ति प्रदर्शन का नाम ही ‘दुर्गा’ है। नवरात्रि का तृतीय दिवस माँ चन्द्रघंटा को समर्पित है।

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