आज का पंचांग : संयमित जीवन

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन

संयमित जीवन

संयम अर्थात एक युद्ध स्वयं के विरुद्ध। संयम मानवीय गुणों में एक प्रधान गुण है। पशुओं में इन्द्रिय निग्रह देखने को नहीं मिलता अर्थात् पशुओं के जीवन में संयम नहीं होता है। स्वयं के द्वारा स्वयं के विरुद्ध लड़ा जाने वाला संग्राम ही संयम कहलाता है। जिस जीवन में संयम नहीं वह जीवन पशु भले न हो पर पशुवत अवश्य हो जाता है।

संयमित जीवन उत्कर्ष की यात्रा करता है तो असंयमितता जीवन को पतन की ओर ले जाती है।व्यक्ति केवल पैरों से ही नहीं फिसलता है अपितु आँखों से, कानों से जिह्वा से और मन से भी फिसल जाता है।

स्वयं के पैरों को गलत दिशा में जाने से रोकना, स्वयं के कानों को गलत श्रवण से रोकना, स्वयं की आँखों को कुदृश्य देखने से रोकना और स्वयं के मन को दुर्भावनाओं से बचाना, यह स्वयं के द्वारा स्वयं के विरुद्ध लड़ा जाने वाला संयम रुपी युद्ध ही तो है। जीवन में संयमी और शुभ कार्यों में अग्रणी, यही तो महापुरुषों के लक्षण हैं।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:01 ए एमसूर्यास्त07:01 पी एम
चन्द्रोदय10:04 ए एमचन्द्रास्त12:34 ए एम, अप्रैल 23
पञ्चाङ्ग
तिथिषष्ठी – 10:49 पी एम तकनक्षत्रआर्द्रा – 10:13 पी एम तक
सप्तमीपुनर्वसु
योगअतिगण्ड – 09:08 ए एम तककरणकौलव – 12:01 पी एम तक
सुकर्मातैतिल – 10:49 पी एम तक
वारबुधवारगर
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते9वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमिथुननक्षत्र पदआर्द्रा – 11:02 ए एम तक
सूर्य राशिमेषआर्द्रा – 04:36 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीआर्द्रा – 10:13 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनीपुनर्वसु – 03:51 ए एम, अप्रैल 23 तक
  पुनर्वसु
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान12 घण्टे 59 मिनट्स 54 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान10 घण्टे 59 मिनट्स 08 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:33 ए एम से 05:17 ए एमप्रातः सन्ध्या04:55 ए एम से 06:01 ए एम
अभिजित मुहूर्तकोई नहींविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:33 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:00 पी एम से 07:22 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:01 पी एम से 08:07 पी एम
अमृत काल12:57 पी एम से 02:26 पी एमनिशिता मुहूर्त12:08 ए एम, अप्रैल 23 से 12:52 ए एम, अप्रैल 23
रवि योग06:01 ए एम से 10:13 पी एम  

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