आज का पंचांग : नवरात्र के उपवास में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड ‘फलाहारी’ खाने से बचें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

नवरात्र में कई भक्त इन नौ दिनों तक उपवास करते हैं। कई लोग बाजार से फलाहारी, विशेष रूप से नवरात्र उपवास के लिए पैक ले आते हैं।’ इनमें से अधिकांश चिप्स और मिक्सचर जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड होते हैं, जिनकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है।

यदि हम नौ दिन तक ये खाते हैं तो यकीन मानों कि हम पेट को आराम नहीं दे पाएंगे। क्योंकि, इनमें प्रिजर्वेटिव्स के तौर पर नमक और चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है। इससे देवों को तपस्या अर्पित करने का मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाता है। लेकिन, कई लोग तर्क देते हैं कि वे ‘फलाहारी’ खाते हैं। इससे व्रत की प्राचीन धारणा को लेकर तो नहीं, लेकिन उन स्नैक्स को लेकर गहराई से विचार को मजबूर कर देते हैं, जो खुद को ‘ उपवास के लिए उपयुक्त’ भोजन कहते हैं।

“फलाहारी’ शब्द ने तमिल शब्द ‘पला-आगारम’ की याद आ जाती है, जिसमें ‘पला’ का अर्थ है कई और “आगारम’ का अर्थ है भोजन। हमारे माता-पिता और दादा-दादी रात के भोजन में हमेशा एक गिलास दूध लेते थे। भूखे रह सकने वाले युवाओं को हल्का सुपचाय एक डिश दी जाती थी। उस समय में इसका उद्देश्य था कि पेट को आधा खाली रख कर भजन व प्रार्थनाओं के साथ ईश्वर को याद किया जाए।

हमारे धर्म में ‘तपस्या’ शब्द का उपयोग बहुत उदारता से किया जाता है। चार धाम यात्रा करने से पहले भी कुछ दिनों पहले से ही तामसिक भोजन का त्याग कर दिया जाता है। जिससे मन शांत रह सके।

सावन में कावड़िए भी अपने भगवान के मंदिर तक पैदल जाते हैं। वे उपवास करते हैं और खुशी-खुशी बगैर चप्पल पहने चलते हैं, जैसे कि यह उनके प्रिय देवी-देवता की स्तुति करने का उनका तरीका है। और वे इसे कष्ट नहीं मानते।

जैसे-जैसे हम आधुनिक युग में आ गए हैं, ‘फलाहारी’ खाना एक नया चलन बन गया है। आज के समय पर एनर्जी ड्रिंक समेत अन्य चीनी युक्त पेय बार-बार पीने से मोटापे का खतरा बढ़ता है। बड़ा सवाल है कि क्या असंगठित क्षेत्र के बाजार में ‘फलाहारी’ के नाम पर बेची जा रही ये तली हुई अन-ब्रांडेड चीजें बढ़िया खाद्य तेल में तली जाती हैं? मुझे तो नहीं लगता। प्रोसेस्ड खाने में अधिकांश ऐसी सामग्री होती है, जो आम आदमी के रसोईघरों में नहीं मिलती। इनमें अक्सर ऐसे एडिटिव्स होते हैं, जो भोजन के फ्लेवर, रंग और टेक्सचर को बढ़ाते हैं। हमने खाद्य विशेषज्ञों को कहते सुना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में से अधिकतर जंक फूड की श्रेणी में आते हैं।

सार यह है कि यदि आप अपने पेट को आराम देने, सेहतमंद रखने का इरादा रखते हैं तो उपवास अच्छा है। लेकिन यदि अपनी जीभ को तरह-तरह के स्वाद देना चाहते हैं तो यह ठीक नहीं।

आज का पंचांग

आश्विन शुक्ल पक्ष तृतीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |आज है वरद चतुर्थी |

आज तृतीया तिथि 07:06 AM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र स्वाति 07:08 PM तक उपरांत विशाखा | वैधृति योग 09:53 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग | करण गर 07:06 AM तक, बाद वणिज 08:19 PM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 01:48 PM – 03:17 PM है | आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा |

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