शनि प्रदोष व्रत आज, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए करें ये उपाय

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

अक्टूबर के महीने में पहला प्रदोष व्रत आज 4 अक्टूबर दिन शनिवार को है। इस बार का शनि प्रदोष व्रत और भी खास है, क्योंकि इस दिन शनिदेव श्रद्धालुओं को साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए मौका भी देंगे।

यह अक्टूबर महीने में शुक्ल पक्ष में लगने वाला प्रदोष व्रत होगा। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा के साथ शनि महाराज की पूजा भी करनी चाहिए। साथ ही पीपल को जल देना चाहिए शाम के समय दीप दिखाना चाहिए।

भगवान शिव की उपासना:  प्रदोष काल (सूर्यास्त का समय) में भगवान शिव का विधिवत श्रृंगार कर उनका पूजन करें. शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और शहद अर्पित करें । रुद्राष्टक या शिव चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं।

आज आश्विन शुक्ल पक्ष द्वादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन, आज है शनि प्रदोष व्रत ।

आज द्वादशी तिथि 05:09 PM तक उपरांत त्रयोदशी | नक्षत्र धनिष्ठा 09:09 AM तक उपरांत शतभिषा | शूल योग 07:26 PM तक, उसके बाद गण्ड योग | करण बालव 05:09 PM तक, बाद कौलव 04:12 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:47 AM है | आज चन्द्रमा कुंभ राशि पर संचार करेगा ।

जीवन में भ्रम हो, भय हो, तो परमात्मा मदद करेंगे

हम मनुष्यों का जीवन जब एक चौराहे पर आता है तो चार अलग-अलग रास्ते होते हैं। जीवनभर साथ रहने वाले भी अलग-अलग रास्तों पर चल पड़ते हैं। ऐसे ही हम लोगों के जीवन में एक त्रिकोण होता है। हमको लगता है, बस तीन ही मार्ग हैं, तीन ही उद्देश्य हैं, तीन ही स्थितियां हैं। लेकिन चौथा कोण अदृश्य, अज्ञात और सबसे महत्वपूर्ण है।

जब जीवन में भ्रम हो, भय हो, तो इस चौथे कोण को ढूंढना, यह परमात्मा होता है। गरुड़ को भ्रम था कि मैंने राम को बंधनमुक्त कराया। ब्रह्मा के पास गए। तो ब्रह्मा ने कहा- बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू। गरुड़, तुम शंकरजी के पास जाओ। और कहीं किसी से ना पूछना।

तुम्हारे संदेह का नाश वहीं होगा। ब्रह्माजी ने ऐसा क्यों कहा कि और किसी से नहीं पूछना? इसका मतलब ये है कि जब हम भ्रम में होते हैं तो समाधान के लिए भटकते हैं। एक स्थिति आएगी कि किसी पर भरोसा मत करना, किसी से आस मत लगाना। जो चौथा कोण है, वहीं टिक जाना।

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