पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |आज है मास शिवरात्रि|
आज त्रयोदशी तिथि 01:51 PM तक उपरांत चतुर्दशी | नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 05:49 PM तक उपरांत हस्त | इन्द्र योग 02:04 AM तक, उसके बाद वैधृति योग | करण वणिज 01:52 PM तक, बाद विष्टि 02:46 AM तक, बाद शकुनि | आज राहु काल का समय 04:30 PM – 05:54 PM है | आज चन्द्रमा कन्या राशि पर संचार करेगा |
दिवाली मनाना आसान है पर दीवाली को पूरे 365 दिन जिंदगी में उतारना कठिन है। कितना ही विज्ञान-तकनीक हावी हो जाए पर भारत में मुहूर्त व्यवस्था प्रभावी रहेगी। बड़े से बड़े आधुनिक जानकार दफ्तर में लैपटॉप खोलने से पहले भगवान की तस्वीर को प्रणाम करते हैं।
यही भारत का शुभ है। दिवाली जीवन में उतारने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। लक्ष्मी समुद्र मंथन से जो प्रकट हुई थीं, वो एक संघर्ष था, जो देवताओं ने और दैत्यों ने मिलकर किया था। संघर्ष में या तो उदासी आ जाती है या उत्साह रहता है। जीवन में जब भी संघर्ष आए, उत्साह बनाए रखिए। और उत्साह के लिए मुहूर्त नहीं देखना पड़ता। ये तो स्वभाव होना चाहिए।
यदि आप सोने-उठने में अनियमितता करते हैं तो पेट के बैक्टीरिया में बदलाव आता है और आप बीमार होते हैं। ऐसे ही कुछ त्योहारों के पूजन में मुहूर्त का बड़ा महत्व है। पर यदि मुहूर्त न सधे तो डरना भी नहीं चाहिए। इसलिए जिस भी मुहूर्त में, जिस भी तिथि में दिवाली मनाएं, उत्साह रखें। तेरा तुझ को अर्पण भाव से परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दें।