गोवर्धन पूजा आज: जानिए इस दिन भगवान कृष्ण को क्यों लगाए जाते हैं 56 प्रकार के भोग


हिमशिखर धर्म डेस्क

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आज (22 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) दीपोत्सव के पांचवें दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। इस पर्व की कहानी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है। गोवर्धन पूजा खासतौर पर कृषि, खेती और दूध व्यापार से जुड़े लोगों के लिए महापर्व की तरह है। इस साल कार्तिक मास की अमावस्या दो दिन थी, इस कारण दीपोत्सव 6 दिनों का है। कल छठे दिन भाई दूज मनाई जाएगी।

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गोवर्धन पूजा पर्व मनाने के लिए भक्त मथुरा और गिरिराज जी पर्वत पहुंचते हैं। गिरिराज जी की पूजा और परिक्रमा करते हैं। जो लोग गिरिराज नहीं जा पाते हैं, वे अपने आंगन में ही गाय के गोबर से गिरिराज जी बनाकर पूजा करते हैं।

भोग का महत्व
कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र देव के प्रकोप से बचाया था, इसलिए सभी ब्रजवासियों द्वारा श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोग तैयार किए गए थे। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और आज भी गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस दिन श्री कृष्ण को 56 भोग लगाते हैं, उनके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है।

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गोवर्धन पूजन विधि
गोवर्धन पूजा करने के लिए घर के आंगन में गाय के गोबर से भगवान कृष्ण की प्रतिमा बनाई जाती है। इसके साथ ही गाय, बछड़े व ब्रज आदि की भी प्रतिमा बनाई जाती है। इसके बाद उसको फूलों से सजाया जाता है। फिर शुभ मुहूर्त में गोवर्धन महाराज को रोली, अक्षत, चंदन लगाएं। फिर दूध, पान, खील बताशे, अन्नकूट अर्पित किए जाते हैं और विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद पूरे परिवार के साथ पानी में दूध मिलाकर गोवर्धन महाराज की परिक्रमा की जाती है और फिर आरती की जाती है। इसके बाद गोवर्धन महाराज के जयाकरे लगाए जाते हैं और घर के बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।

गोवर्धन पूजा की कथा

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि को देवराज इंद्र की पूजा हुआ करती थी लेकिन भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि पूजा का कोई लाभ नहीं मिल रहा है इसलिए देवराज इंद्र की पूजा ना करें। भगवान कृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने पूजा नहीं की। जब यह जानकारी इंद्र को मिली तो इंद्रदेव ने अपने घमंड के चलते पूरे ब्रज में तूफान और बारिश का कहर मचाया। तब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की था और इंद्र के घमंड को तोड़ा था। साथ ही भगवान को सभी तरह की मौसमी सब्जियों से तैयार अन्नकूट को भोग लगाया था। तब से हर साल इस तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

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