हनुमान जी से सीखे संघर्ष, क्षमता, साहस और चतुराई के गुर

चम्बा: छात्र-छात्राओं को प्रत्येक कार्य में दक्षता हासिल करने के लिए मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर में हनुमान मैनेजमेंट कार्यालय आयोजित की गई। इस दौरान चार चार मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।


सरस्वती शिशु मंदिर में युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को हनुमान मैनेजमेंट के वैज्ञानिक महत्व बतलाए। प्रधानाचार्य पूर्ण सिंह रावत ने कहा कि संघर्ष, क्षमता, साहस, चतुराई की कला हनुमान जी से सीखने को मिलती है। कहा कि हनुमान समय, वाणी, ज्ञान और संसाधनों का सटीक प्रयोग करना जानते हैं, इसीलिए संसार के सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरु कहे जाते हैं। रामायण में जिस कुशलता से हनुमान ने तमाम समस्याओं का हल किया वो बिना सही मैनेजमेंट के मुमकिन नहीं था। बजरंगबली ने लंका में जाकर सबसे पहले लंका की संरचना को समझा। असुरों की सभा में विभीषण जैसे सज्जन को ढूंढा। विभीषण से मित्रता की और सीता का पता लगाया। मनोहर लाल रतूड़ी ने कहा कि हनुमान का चरित्र सेवा और आत्म समर्पण का प्रत्यक्ष रूप है। संघर्ष, क्षमता, साहस, चतुराई की कला हनुमान से सीखने को मिलती है। मेधावी छात्र सृष्टि सेमवाल, सूर्याश कुमार, ऋषभ उनियाल, आकर्ष रावत को सम्मानित किया गया इस मौके पर ओम प्रकाश कोठारी, प्यार सिंह भंडारी, कमला चमोली, यशोदा तोमर, ममता चौहान, निर्मला रौथाण, ममता ममगाई, वर्षा सुयाल आदि उपस्थित रहे।

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