आज का पंचांग : अतिरिक्त सुविधाएं-साधन आपको झुलसा भी सकते हैं

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

पौष कृष्ण पक्ष षष्ठी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |

आज षष्ठी तिथि 01:46 PM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र मघा 02:44 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी | वैधृति योग 12:45 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग | करण वणिज 01:47 PM तक, बाद विष्टि 01:45 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 12:19 PM – 01:39 PM है | आज चन्द्रमा सिंह राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

हम सूर्य को नमस्कार अथवा पूजा उसकी उँचाई या मात्र धार्मिक आधार के कारण ही नहीं करते अपितु उसकी उपयोगिता एवं गुणों के कारण भी करते हैं। इसलिए सदैव स्मरण रहे कि व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व पूजनीय है.!!

आज का भगवद् चिंतन
प्रेम की सामर्थ्य

प्रेम में अद्भुत सामर्थ्य है। जहाँ प्रेम होता है वहाँ परमात्मा भी जीव के बस में हो जाते हैं। चाहे केवट के आगे हो, चाहे शबरी के आगे हो, चाहे हनुमानजी के आगे वो, चाहे सुग्रीव के आगे हो या चाहे विभीषण के आगे हो, प्रेम के वशिभूत होकर कितनी ही बार उन प्रभु को झुकते देखा गया है। प्रभु प्रेम में झुके हैं इसलिए जो प्रेम स्वयं भगवान को झुका सकता है, वह इंसान को भी अवश्य झुका सकता है।

यदि आप दूसरों से प्रेमपूर्ण व्यवहार करते हैं तो आप उनके हृदय पर अपना आधिपत्य भी जमा लेते हैं। किसी को जीतना चाहते हैं तो प्रेम से जीतो। बल के प्रयोग से तो किसी-किसी को ही जीता जा सकता है, लेकिन प्रेम द्वारा सबको जीता जा सकता है। प्रेम वो शहद है जो संबंधों को मधुर बनाता है। मधुर संबंध पारिवारिक खुशहाली को जन्म देते हैं और पारिवारिक खुशहाली ही तो एक सफल एवं आनंदमय जीवन की नींव है।

अतिरिक्त सुविधाएं-साधन आपको झुलसा भी सकते हैं

बड़े लोगों के बच्चे बड़े भी हो जाते हैं और बिगड़ भी जाते हैं। हम युवा पीढ़ी को समझाएं कि यदि आपको धन, शिक्षा, मौज-मस्ती में परिवार से समर्थन मिल रहा है तो उसके दुरुपयोग से बचना। रामकथा में जब वानर सीता जी की खोज में गए तो उन्हें समुद्र तट पर सम्पाति मिला, जो जटायु का बड़ा भाई था।

सम्पाति ने कहा मैं बंदरों को खाऊंगा तो वानरों ने बताया कि हम किस सद्‌कार्य के लिए जा रहे हैं और तुम्हारे भाई ने सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण दे दिए। तो सम्पाति जो घटना सुनाते हैं, वो आज की पीढ़ी के लिए उपयोगी है। सम्पाति कहते हैं हम दोनों भाई सूर्य की परीक्षा के लिए सूर्य की ओर उड़े। हमारे पंख जले।

जटायु लौट आए पर मैं घायल होकर आज तक पड़ा हूं। ये दोनों सूरज के सारथि अरुण के बेटे थे और गरुड़ के बड़े भाई थे अरुण। सूरज का सात घोड़े वाला रथ अरुण चलाते हैं। सूर्य के सारथि अरुण के बेटे सूर्य से ही जल गए। इसलिए, बच्चों को समझना होगा कि अगर आप को सुविधाएं-साधन मिल रहे हैं, तो वो आपको झुलसा भी सकते हैं। ऊंची उड़ान उड़ें पर अपने पंख सम्भालके रखें।

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