पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
पौष कृष्ण पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |
आज अष्टमी तिथि 02:57 PM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 05:50 AM तक उपरांत हस्त | प्रीति योग 11:11 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग | करण कौलव 02:57 PM तक, बाद तैतिल 03:43 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 11:01 AM – 12:20 PM है | आज 10:20 AM तक चन्द्रमा सिंह उपरांत कन्या राशि पर संचार करेगा |
शुभ काम को आज नहीं कल करेंगे, यह विचार ही आपको अधार्मिक बना देगा। धार्मिक व्यक्ति शुभ में विलम्ब नहीं करता और अशुभ को टालने में देर नहीं करता। हमारे जीवन में नित्य दो शुभ घड़ियां आती हैं, एक सोने के ठीक पहले और दूसरा उठने के तुरंत बाद। और हम दोनों समय लापरवाह हो जाते हैं।
यदि नींद की परेशानी आपके जीवन में मंडरा रही है तो इससे बड़ी सावधानी से निपटें। कोशिश करें सोने और उठने का समय नियत हो, यह बार-बार बदले ना। और जब आप उठें तो उठते ही योग की कोई न कोई त्वरित क्रिया करें। हो सके तो पलंग पर ही कर लें अथवा अपने शयन-कक्ष में किसी कुर्सी पर बैठकर करें।
वो योग की क्रिया क्या होगी, इसके चयन के लिए आप स्वतंत्र हैं। लेकिन जब सात-आठ घंटे की नींद के बाद पहली बार आपका मेरुदण्ड सीधा हुआ हो तो कोई न कोई योग की क्रिया करें। और जब रात को सोने जाएं तो नींद आने के ठीक पहले दस मिनट तक कोई काम न करें, एक अंधेरा हो बाहर भी और भीतर भी। एकांत-चिंतन के साथ सोएं।