आज का पंचांग : नशे के प्रति सतर्क नहीं रहे तो मानसिक रोग बढ़ेंगे

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

नशा, खासतौर पर शराब बड़े अपराध को भी जन्म दे रही है। एक ऐसी मानसिकता तैयार हो गई है कि नशा कर लो हिम्मत आ जाएगी। यदि माता-पिता शराबी हैं तो उनके बच्चे भी शराबी हो सकते हैं। माता-पिता का दौर तो निकल जाएगा, लेकिन आने वाले 30 साल में इंसान की समझ संकुचित होती जाएगी।

ऐसे में शराब का नशा शरीर को अत्यधिक प्रभावित करेगा और शारीरिक रोग के साथ मानसिक रोग बढ़ जाएंगे। जिन्हें शराब छोड़ना हो या जो चाहते हैं कि हम शराब न पिएं, उन्हें इस शरीर के भीतर जो आत्मा है, उसके प्रति जागृति लाना पड़ेगी और यह योग से होगा।

योग का मतलब केवल व्यायाम नहीं है। योग की जो सबसे बड़ी उपलब्धि है, वो ये है कि यह आपको आपकी आत्मा तक यात्रा कराता है। विज्ञान भी कहता है कि किशोर मस्तिष्क पर शराब का सबसे बुरा असर पड़ता है। उसको लत लग जाती है। जो लोग शराब को केवल थोड़ी ताजगी के लिए पीते हैं, उन्हें जब इसकी लत लगेगी, तब ये बहुत महंगा सौदा होगा।

आज का भगवद् चिंतन
प्रसन्नता को भीतर खोजो

जीवन को प्रसन्नता के साथ जीना सीखो क्योंकि प्रत्येक दिन शाम को केवल सूरज ही नहीं ढलता, हमारी जिंदगी भी ढलती है। जीवन में दुःखी रहने के बहुत कारण हो सकते हैं, लेकिन हम ढूँढकर देखेंगे तो पायेंगे कि ऐसे बहुत कारण भी हैं, जिन्हें जीवन में खुशी का आधार बनाया जा सकता है। सबको अपने-अपने जीवन से शिकायतें भी बहुत होंगी, लेकिन विचार करने पर पाओगे कि जीवन में खुश रहने के भी बहुत कारण हैं।

नीम कड़वा अवश्य है, लेकिन अनेक औषधीय गुणों से भरपूर भी है। ऐसे ही जीवन में कुछ बातें कड़वी होंगी लेकिन हमारे लिए हितकर भी होंगी। सरोवर में कीचड़ को देखकर उसे अपनी अप्रसन्नता का कारण मत बनाओ अपितु उसमें खिले कमल को अपनी प्रसन्नता का आधार बनाओ। काँटो को अपनी अप्रसन्नता का कारण मत बनाओ अपितु गुलाब को देखकर प्रसन्न हो जाओ। जीवन में सुख हमारे हाथों में नहीं, लेकिन प्रसन्नता हमारे भीतर की ही उपज है।

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