आज का पंचांग : अस्तित्व के उपहार

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज का विचार

उस पछतावे के साथ मत जागिये, जिसे आप कल पूरा नहीं कर सके। उस संकल्प के साथ जागिये, जिसे आपको आज पूरा करना है.!

माघ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |

आज त्रयोदशी तिथि 08:25 AM तक उपरांत चतुर्दशी तिथि 05:52 AM तक उपरांत पूर्णिमा | नक्षत्र पुनर्वसु 01:34 AM तक उपरांत पुष्य | विष्कुम्भ योग 01:33 PM तक, उसके बाद प्रीति योग | करण तैतिल 08:26 AM तक, बाद गर 07:07 PM तक, बाद वणिज 05:53 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 09:55 AM – 11:17 AM है | आज 08:01 PM तक चन्द्रमा मिथुन उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा |

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हमारी भारतीय संस्कृति में किसी की कुशलता पूछना जीवंत कृत्य है। धीरे-धीरे इसे हमने आदत बना लिया, जबकि यह पूछताछ स्वभाव होना चाहिए। हम समाज में किसी से मिलते हैं तो पूछते हैं कैसे हो? वो कहता है अच्छे हैं। न पूछने वाले को मतलब, न बताने वाले को लेना-देना। सच तो यह है कि कुशलता पूछने पर कोई अपना रोना रोने लग जाए तो आप जीवन में दुबारा किसी ने नहीं पूछेंगे।

तुलसीदास जी ने प्रसंग लिखा है कि गरुड़ जी जब पहुंचे तो काकभुशुंडि जी ने उनसे कुशलता पूछी- अति आदर खगपति कर कीन्हा, स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा। उन्होंने पक्षीराज गरुड़ का बहुत ही आदर-सत्कार किया और स्वागत-कुशल पूछकर बैठने के लिए सुंदर आसन दिया। जबकि आज धीरे-धीरे सबकुछ औपचारिक हो गया है।

टेक्नोलॉजी के साथ बायोइन्फॉर्मेटिक्स के कारण मनुष्य के भीतर का मनुष्य विस्थापित हो रहा है। एक दिन हम अपने को बायोटेक्नोलॉजिकल मनुष्यों से ही घिरे पाएंगे और उस समय संवेदनाएं बचाना बहुत बड़ी चुनौती हो जाएगा।

आज का भगवद् चिंतन
अस्तित्व के उपहार

अस्तित्व के उपहार का सम्मान करना भी सीखिए। जो कुछ भी अस्तित्व द्वारा हमारे लिए उपहार स्वरूप प्रदान किया गया है, उसके प्रति अहोभाव रखते हुए उसके महत्व को भी समझिये। मानव मन की मनोवृत्तियाँ ऐसी हैं, कि जब तक हमारे द्वारा कोई मूल्य अदा नहीं किया जाता तब तक किसी प्राप्त वस्तु का महत्व भी समझ नहीं आ पाता है।

इस संसार की सबसे उत्तम औषधि हँसी है, सबसे बड़ी सम्पत्तिबुद्धि है, सबसे अच्छा मित्र धैर्य है तो सबसे अच्छी सुरक्षा विश्वास है और ये सभी अस्तित्व द्वारा हमें निशुल्क ही प्रदान हुआ है। जो विषमताओं में भी प्रसन्न रहना जानता है, उसे स्वस्थता के लिए किसी अन्य औषधि की भी आवश्यकता नहीं क्योंकि उसका प्रसन्न रहना ही उसके जीवन के लिए औषधियों के समान है।

जिसके पास बुद्धि और विवेक है, उसे परम संपत्तिवान ही समझना चाहिए। जिसके पास धैर्य है, उसके पास सुख-दुःख, लाभ-हानि प्रत्येक स्थिति में सँभालने वाला मित्र ही है। जिसके पास विश्वास है, उसका जीवन उद्वेग से, संदेह से एवं निराशा से सदैव सुरक्षित है। अस्तित्व ने सब निशुल्क एवं अनमोल ही दिया है, उनका उपयोग तो कर सकते हैं, खरीद नहीं सकते।

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