आज का पंचांग : शब्दों की मर्यादा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

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पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष सप्तमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |

आज सप्तमी तिथि 05:01 AM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र स्वाति 05:02 AM तक उपरांत विशाखा | गण्ड योग 12:07 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग | करण विष्टि 03:55 PM तक, बाद बव 05:01 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 04:51 PM – 06:14 PM है | आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा |

आज का विचार

लक्ष्य हमेशा सही दिशा में होना चाहिए, कार्य तो दिन-रात दीमक भी करती है, लेकिन निर्माण नहीं, विनाश करती है.!!

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आज का भगवद् चिंतन
शब्दों की मर्यादा

मनुष्य के शब्द ही नहीं बोलते अपितु उसका संस्कार भी बोलता है। जिस प्रकार अच्छी सुगंध अच्छे इत्र की पहचान होती है, उसी प्रकार अच्छे शब्द अच्छे मनुष्य की पहचान होते हैं। शब्द किसी मनुष्य के संस्कारों के मूल्यांकन का सबसे प्रभावी और सटीक आधार होता है। स्वभाव में विनम्रता, शब्दों में मिठास और कर्म में कर्तव्यनिष्ठा ये श्रेष्ठ संस्कारों के परिचायक हैं। इसका सीधा सा अर्थ यह भी हुआ कि आपकी परवरिश श्रेष्ठ संस्कारों में हुई है।

शब्द वो शस्त्र हैं कभी-कभी जीवन निकल जाने पर भी जिनका घाव नहीं भर पाता है। इसलिए जीवन में इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि जब भी बोला जाए, मर्यादा में रहकर ही बोला जाए ताकि किसी दूसरे के द्वारा आपके संस्कारों के ऊपर कोई प्रश्न चिह्न खड़ा न किया जा सके। एक बात और कुशब्द प्रयोग से निशब्द हो जाना कई गुना बेहतर है। अमर्यादित बोलने की अपेक्षा मौन साध लेना उससे भी श्रेष्ठ उत्तर है।

मनुष्य को कर्म नहीं भटकाते, कर्म करने का दबाव परेशान नहीं करता, उसे कर्त्ताभाव परेशान करता है। कर्म करने और कर्त्ताभाव में अंतर है। कर्त्ताभाव का अर्थ है मैं यह काम कर रहा हूं। ये जो मैं है, यही परेशानी का कारण है।

ये सही है कि हम ही कर रहे हैं, पर कर्त्ताभाव के अभाव का अर्थ है कोई एक परम शक्ति है, जो हम से करा रही है, तो हम कर रहे हैं। आजकल हमारे जीवन में सहज ही डिजिटल मीडिया के कारण कई वैद्य डॉक्टरों की भरमार हो गई है। स्वास्थ्य को लेकर जानकारियों की झड़ी लगी हुई है और हम सब भी कुछ न कुछ करने के लिए इस सबमें उतर जाते हैं।

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झूठे आश्वासन, अतार्किक चिकित्सा, अंधविश्वास से भरी धार्मिक कथाओं, फिजूल के किस्सों आदि के लपेटे में न आएं। ये अप्रत्याशित समाधान जो सोशल मीडिया से पेश किए जा रहे हैं, इनके प्रति अतिरिक्त सावधान रहें। परमात्मा पर जितना भरोसा होगा, उतनी सावधानी जीवन में आ जाएगी और संसार से उतने ही धोखे कम मिलेंगे।