पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
नाकामी की तलवार सब पर लटकती है। और इसके वार से बचने के लिए हमारे हाथ में भी तलवार और साथ में ढाल भी होनी चाहिए। हमारे हाथ की तलवार परिश्रम की हो और ढाल ईमानदारी की रहे। ऐसा करते समय आपको, आपके ही भीतर का मन कमजोर कर देगा। क्योंकि मन लगातार नकारात्मक पैंतरे चलता है।
अगर मन सक्रिय है तो हम भय और संदेह में गिरेंगे ही। तो जब भी कोई बड़ा काम करें, ‘माइंड साउंड’ को जरूर सुनें। इसका इलाज करिए। और मन के दो ही इलाज हैं- मौन और मेडिटेशन। आज हमारे देश में अधिकंाश लोग किसी ना किसी बीमारी का इलाज ले रहे हैं।
कई दवाई तो टॉफी की तरह खाई जा रही है। ऐसे समय, आप भी एक इलाज लीजिए और वो होगा मौन और मेडिटेशन का। क्योंकि नाकामी की तलवार लटकी रहे, यही ठीक है। कहीं उसने हम पर वार किया और हमारी तैयारी नहीं हुई तो फिर उदासी, अवसाद तो आना ही है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ | आज है कालाष्टमी|
आज अष्टमी | नक्षत्र विशाखा | वृद्धि योग 12:51 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग | करण बालव 06:13 PM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 08:30 AM – 09:53 AM है | आज 01:11 AM तक चन्द्रमा तुला उपरांत वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |
आज का भगवद् चिंतन
व्यवहार में योग
योग ही जीवन की आंतरिक प्रसन्नता का आधार है। अपने जीवन को योगी बनाकर जियें अथवा भोगी बनाकर, ये व्यक्ति के स्वयं के ऊपर निर्भर है। सफलता अकेले नहीं आती वह अपने साथ अभिमान को लेकर भी आती है और यही अभिमान हमारे दुःखों का कारण बन जाता है। असफलता भी अकेले नहीं आती, वह भी अपने साथ निराशा को लेकर आती है और निराशा स्वयं प्रगति पथ में एक बड़ी बाधा है।
दु:ख, कटुवचन और अपमान सहने की क्षमता का विकास तथा सुख, प्रशंसा और सम्मान पचाने की सामर्थ्य ही व्यवहार जगत का योग भी है। प्रत्येक स्थिति का मुस्कुराकर सामना करने की क्षमता, किसी भी स्थिति को अच्छी या बुरी न कहकर समभाव में रहते हुए अपने कर्तव्य पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का कौशल, यही जीवन का योग है। योगमय जीवन ही तो योगेश्वर तक पहुँचाता है।
आज का विचार
बहुत बार जीवन में हमारी अपेक्षा के अनुरूप फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है। अपेक्षा के अनुरूप फल की प्राप्ति न हो पाना ही हमारे जीवन में दुःखों का एक प्रमुख कारण भी है.!!
॥ जय श्री राधे कृष्ण ॥
🌺🌷सुप्रभात 🌷🌺