पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वादशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ |आज है प्रदोष व्रत|
आज द्वादशी तिथि 04:01 PM तक उपरांत त्रयोदशी | नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 06:16 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा | सिद्धि योग 03:17 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण तैतिल 04:02 PM तक, बाद गर 04:38 AM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 09:52 AM – 11:16 AM है | आज 12:42 AM तक चन्द्रमा धनु उपरांत मकर राशि पर संचार करेगा |
शनि प्रदोष व्रत आज
हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साल 2026 के फरवरी महीने के पहले प्रदोष व्रत को लेकर लोगों में संशय है, क्योंकि इस बार त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी से शुरू होकर 15 फरवरी को खत्म हो रही है।
प्रदोष कब है?
फरवरी 2026 में त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी की शाम 04:01 बजे से शुरू होकर 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे तक रहेगी। ऐसे में 14 फरवरी की संध्या बेला यानी प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026, दिन शनिवार को रखा जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
क्यों खास है यह प्रदोष व्रत?
जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है तो उसका महत्व और बढ़ जाता है। शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से रखने पर जीवन की बाधाएं कम होती हैं और कर्म संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनि प्रदोष व्रत शनि दोष, कालसर्प दोष और पितृ दोष के शमन में सहायक माना जाता है। जो लोग करियर में रुकावट, आर्थिक दबाव या मानसिक तनाव से गुजर रहे हों, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त
14 फरवरी 2026 को प्रदोष काल में पूजा करना सबसे शुभ माना जाएगा। इस दिन शाम 06:10 बजे से रात 08:44 बजे तक का समय विशेष रूप से पूजन के लिए अनुकूल रहेगा। यही वह अवधि है जब भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम फल प्राप्त होता है।
इसके अतिरिक्त गोधूलि मुहूर्त 06:08 बजे से 06:34 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस समय शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं और मंत्र जाप कर सकते हैं। निशिता मुहूर्त 15 फरवरी की रात्रि में अवश्य रहेगा, लेकिन प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा 14 फरवरी की संध्या में ही की जाएगी।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें। संध्या समय पुनः स्नान कर पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान शिव का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और सफेद पुष्प अर्पित करें।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा श्रवण करें। आरती के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित करें। व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करें। कुछ लोग फलाहार करते हैं तो कुछ एक समय भोजन लेकर व्रत पूर्ण करते हैं। यह श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार रखा जा सकता है। व्रत के अगले दिन 15 फरवरी को व्रत का पारण करें।
क्या न करें
- तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन न करें।
- अनाज का सेवन: व्रत के दौरान अन्न ग्रहण न करें।
- क्रोध और वाद-विवाद: मन शांत रखें, किसी का अपमान न करें और झूठ बोलने से बचें।
- नमक से परहेज: यदि व्रत में कुछ खाएं तो साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का उपयोग करें।
- दिन में न सोएं: व्रत के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए, इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।
आज का भगवद् चिंतन
वासना से मुक्त होना ही प्रेम है
वासना से मुक्त होना ही प्रेम है। प्रेम की कोई माँग नहीं, प्रेम की कोई शर्त नहीं और प्रेम का कोई कारण भी नहीं। प्रेम निस्वार्थ है, प्रेम बेशर्त है और प्रेम अकारण ही है। समर्पण की बहुत गहराइयों से प्रेम का जन्म होता है, इसीलिए प्रेम कुछ पाना नहीं अपितु कुछ देना चाहता है। प्रेम लूटना नहीं, स्वयं लुटना चाहता है। दूसरों के सुख में ही हमारा सुख है, दूसरों की प्रसन्नता में ही हमारी प्रसन्नता है, यही प्रेम का स्वभाव है।
बिना प्रेम के जीवन का सौंदर्य विकसित नहीं हो सकता है। प्रेम ही जीवन को सरस बनाता है, प्रेम ही जीवन को आनंद के मधु से भर देता है और प्रेम ही जीवन को प्रसन्नता की सुगंधि से महका देता है। जहाँ स्वयं के सुख की कामना है, वहाँ प्रेम नहीं अपितु मोह है, वासना है। वासना गिराती है-प्रेम उठाता है, वासना बंधक बनाती है-प्रेम मुक्त करता है और वासना स्वयं की तरफ खींचती है-प्रेम परमात्मा से जोड़ देता है।