पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | चतुर्थी – 01:00 पी एम तक | नक्षत्र | रेवती – 07:07 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| पञ्चमी | अश्विनी | ||
| योग | शुभ – 03:51 पी एम तक | करण | विष्टि – 01:00 पी एम तक |
| शुक्ल | बव – 12:06 ए एम, फरवरी 22 तक | ||
| वार | शनिवार | बालव | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | फाल्गुन – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 9 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मीन – 07:07 पी एम तक | नक्षत्र पद | रेवती – 07:39 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| मेष | रेवती – 01:23 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | कुम्भ | रेवती – 07:07 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | शतभिषा | अश्विनी – 12:50 ए एम, फरवरी 22 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | शतभिषा | अश्विनी – 06:32 ए एम, फरवरी 22 तक | |
| अश्विनी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 22 मिनट्स 51 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 36 मिनट्स 13 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:46 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:23 ए एम से 06:14 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:49 ए एम से 07:04 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:23 पी एम से 01:09 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:40 पी एम से 03:25 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:25 पी एम से 06:50 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:27 पी एम से 07:43 पी एम |
| अमृत काल | 04:49 पी एम से 06:21 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:20 ए एम, फरवरी 22 से 01:11 ए एम, फरवरी 22 |
| रवि योग | 07:04 ए एम से 07:07 पी एम |
बच्चे खिलौनों से खेलेंगे ही सही, उनके लिए खिलौने तोड़ना भी एक खेल है। खेलने की उम्र में उन्हें खूब खिलौनों से खेलने दीजिए। हां, एक काम लगातार करते रहिए और वो ये कि उन्हें प्रौढ़ जरूर करते चलें। उनके भीतर ये भावना जगाएं कि ये सब अस्थाई है, एक दिन छूटेगा।
इस तरह वे जीवन के प्रति एक धैर्यवान दृष्टिकोण बना सकेंगे। आजकल स्कूलों में छोटी कक्षाओं में भी ‘बुलीइंग’ की समस्या देखने को मिल रही है। किसी के ऊपर गंभीर टिप्पणी करना, लतीफे छोड़ना, शारीरिक हमला, जाति पर टिप्पणी, बोलने का तरीका, पहनावे पर भद्दे कमेंट किए जाएं तो इसे बुलीइंग कहते हैं।
संकोची और सीधे-सादे बच्चे इसके शिकार हो रहे हैं। यह एक दिन बड़ी समस्या बनने वाली है। इसलिए कम उम्र में बच्चे जब खिलौने से खेल रहे हों तो उनको एक प्रौढ़ता का एहसास कराएं कि तुम्हारे जीवन में कई ऐसे खिलौने और चुनौतियां आएंगी, उन्हें लेकर बहुत परेशान मत होना। तब शायद वे बुलीइंग की समस्या से बाहर निकल पाएं। यह परिपक्वता उनको कभी किसी के सामने टूटने नहीं देगी।
आज का भगवद् चिंतन
जीवन में विचारों की भूमिका
विचारों की दुषिता का प्रभाव हमारे जीवन की धवलता को उसी तरह सौंदर्य विहीन कर देती है, जिस तरह काला रंग सफेद कागज को। हमारे जीवन निर्माण में विचारों की बहुत अहम भूमिका होती है। जितने स्वच्छ हमारे विचार होंगे निसंदेह उतना स्वच्छ हमारा जीवन भी होगा। जीवन के गुलदस्ते में कलुषित विचार काले रंग के समान हैं, जो उसके सौंदर्य को नष्ट कर देते हैं।
मैले और गंदे आवरण से परहेज रखना अच्छा है पर मैले और गंदे आचरण से परहेज रखना उससे भी महत्वपूर्ण है। विचारों से हमारे आचरण का निर्माण होता है। स्वच्छ विचार ही श्रेष्ठ आचरण को जन्म देते हैं। जिस प्रकार कपड़ों को स्वचछ रखने का सदैव प्रयास करते हो ऐसे ही विचारों को स्वच्छ रखने के लिए भी सदैव प्रयासरत रहें क्योंकि तन से ज्यादा मन की और चेहरे से ज्यादा चरित्र कि स्वच्छता जीवन को श्रेष्ठ बनाती है।