पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
कठिनाइयों से डरो मत, प्रयासरत रहो
यदि हम कोई दोष सुधारना चाहते हैं या कोई कठिनाई दूर करना चाहते हैं, तो बस एक ही प्रक्रिया है- स्वयं को पूर्णतः चैतन्य बनाए रखना, पूर्णरूप से जाग्रत रहना। सबसे पहले हमें अपने लक्ष्य को साफ-साफ देखना होगा; परंतु इसके लिए अपने मन पर निर्भर नहीं रहना होगा, क्योंकि वह बार-बार इतस्ततः करता है। संदेह, भ्रम एवं हिचकिचाहटों के अंबार पैदा करता है। इसलिए एकदम आरंभ में ही हमें यह ठीक-ठीक जानना चाहिए कि हम क्या चाहते हैं, मन से नहीं जानना चाहिए, बल्कि एकाग्रता के द्वारा, अभीप्सा के द्वारा और पूर्णतः संकल्पशक्ति के द्वारा जानना चाहिए। यह बहुत ही आवश्यक बात है।
दूसरे, धीरे-धीरे निरीक्षण के द्वारा, सतत और स्थायी जागरूकता के द्वारा, तुम्हें एक पद्धति ढूँढ़ निकालनी चाहिए, जो तुम्हारे अपने लिए व्यक्तिगत हो, केवल तुम्हारे लिए ही उपयुक्त हो। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजी प्रक्रिया ढूँढ़ निकालनी चाहिए, जो व्यवहार में लाने पर धीरे-धीरे अधिकाधिक स्पष्ट और सुनिश्चित होती जाए। तुम एक विषय को सुधारते हो, दूसरे को एकदम सरल बना देते हो और क्रमशः इस तरह आगे बढ़ते रहते हो। इस प्रकार कुछ समय तक सब ठीक-ठीक चलता रहता है।
परंतु एक सुहावने प्रातः काल में तुम्हारे सामने कठिनाई आ उपस्थित होगी, एकदम अकल्पनीय और तुम निराश होकर सोचोगे कि सब कुछ व्यर्थ हो गया। पर बात ऐसी बिलकुल नहीं है, यह तुम निश्चित रूप से जान लो कि जब तुम अपने सामने इस तरह की कोई दीवाल देखते हो तो यह किसी नई चीज का प्रारंभ होता है। इस तरह बार-बार होगा और कुछ समय बाद हमें इसकी आदत पड़ जाएगी। निरुत्साहित होने और प्रयास छोड़ देने की बात तो दूर, तुम प्रत्येक बार अपनी एकाग्रता, अपनी अभीप्सा एवं अपने विश्वास को बढ़ाते जाओगे और जो नई सहायता तुम्हें प्राप्त होगी, उसके सहारे हम दूसरे साधनों को विकसित करेंगे और जिन साधनों को हम पार कर चुके हैं, उनके स्थान पर उन्हें बैठाओगे।
सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि जो कुछ हमने जाना उसे व्यवहार में ले लाना होगा और यदि हम सतत प्रयास करते रहेंगे, तो अवश्य सफल होंगे। कठिनाई बार-बार आएगी। जब तुम अपने लक्ष्य पर पहुँच जायेंगे तब, केवल तभी सभी कठिनाइयाँ केवल एक ही बार में सदा के लिए विलीन हो जाएँगी।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वादशी – 08:43 पी एम तक | नक्षत्र | पुनर्वसु – 09:35 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| त्रयोदशी | पुष्य | ||
| योग | सौभाग्य – 05:02 पी एम तक | करण | बव – 09:36 ए एम तक |
| शोभन | बालव – 08:43 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | कौलव | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | फाल्गुन – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 16 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कर्क | नक्षत्र पद | पुनर्वसु – 09:35 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | कुम्भ | पुष्य – 03:18 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | शतभिषा | पुष्य – 09:02 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | शतभिषा | पुष्य – 02:48 ए एम, मार्च 01 तक | |
| पुष्य |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 33 मिनट्स 58 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 25 मिनट्स 01 सेकण्ड |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:45 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:18 ए एम से 06:08 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:43 ए एम से 06:58 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:22 पी एम से 01:08 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:40 पी एम से 03:27 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:29 पी एम से 06:54 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:32 पी एम से 07:46 पी एम |
| अमृत काल | 07:18 ए एम से 08:49 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:19 ए एम, मार्च 01 से 01:09 ए एम, मार्च 01 |
| 02:26 ए एम, मार्च 01 से 03:58 ए एम, मार्च 01 | |||
| त्रिपुष्कर योग | 06:58 ए एम से 09:35 ए एम |