देहरादून : बीजेपी आर्थिक प्रकोष्ठ सहसंयोजक सी.ए. राजेश्वर पैन्यूली ने बजट की तारीफ करते हुए कहा, कि धामी सरकार ने हर वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि खासकर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बजट में किए गए प्रावधान सराहनीय हैं.

सी.ए. पैन्यूली ने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया. इस बार सरकार ने ₹1,11,703.21 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत अधिक है. यह बजट राज्य के समग्र विकास, मजबूत बुनियादी ढांचे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
पूंजीगत खर्च के साथ साथ रेवेन्यू के खर्चे का भी पूरा ध्यान रखा गया है. बजट लगभग 10% से बढ़कर 1.11 लाख करोड़ का हो गया है.
कहा कि बजट में पहाड़ को रोजगार से जोड़ने, पर्यटन, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर सड़क उपलब्ध कराने की बात की गई है, जो कि राज्य सरकार का सराहनीय कार्य है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तराखंड के लोगों को धरातल पर बेहतर मूलभूत सुविधाएं मिल सके ऐसी वे उम्मीद करते हैं. उन्होंने बजट को महिलाओं के लिए लाभकारी बताया. उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. इससे महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बन रही हैं, उन्होंने कहा कि यदि इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन किया गया, तो पहाड़ की कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी, परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर सकेंगी.
कहा कि धामी सरकार के इस बजट से महिला कल्याण की योजनाएं परवान चढ़ेंगी। सरकार ने इस वर्ष भी जेंडर बजट बढ़ाया है। पिछले साल इसमें 2423 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी। इस साल इस साल पिछले साल से 2730 करोड़ और बढ़ा बजट रखा गया है।
सरकार ने बजट में अन्नदाताओं के लिए भी कई योजनाओं में अच्छे खासे बजट की व्यवस्था की है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए 39.90 करोड़, मोटा अनाज मिशन योजना के प्रोत्साहन के लिए 12 करोड़, स्थानीय फसलों को प्रोत्साहित कार्यक्रम के लिए 5.75 करोड़, किसान पेंशन योजना के लिए 12.6 करोड़, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 160.13 करोड़, दुग्ध मूल्या प्रोत्साहन योजना के तहत 32 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
सरकार में नई सोच, नवाचार, अवस्थापना विकास के साथ अलग-अलग वर्गों के लिए किए गए प्रावधान को संतुलन से परिभाषित किया है। संतुलन यानी समावेशी विकास, आत्मनिर्भर, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव व शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति, न्यायपूर्ण व्यवस्था पर बजट में प्राथमिकता दी गई है।