आज का पंचांग : माँ स्कंदमाता नमोऽस्‍तुते

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का विचार

किसी से बदला लेने का नहीं अपितु स्वयं को बदल डालने का विचार ज्यादा श्रेष्ठ है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि दूसरे आपको गलत समझते हैं अपितु यह है कि आप गलत भाव से कोई कर्म नहीं करते हैं.!

आज का विचार

किसी से बदला लेने का नहीं अपितु स्वयं को बदल डालने का विचार ज्यादा श्रेष्ठ है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि दूसरे आपको गलत समझते हैं अपितु यह है कि आप गलत भाव से कोई कर्म नहीं करते हैं.!

आज का भगवद् चिन्तन

माँ स्कंदमाता नमोऽस्‍तुते

माँ स्कंदमाता का स्वरूप कल्याणकारी एवं अति प्रेरणा दायक है। नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कन्दमाता की आराधना की जाती है। कार्तिकेय जी को ही स्कन्द जी के नाम से जाना जाता है, इसी कारण माँ को स्कन्दमाता भी कहा जाता है। कार्तिकेय जी को पुरुषार्थ का स्वरूप बताया गया है। निरंतर अपने कर्म में संलग्न रहने वाला मनुष्य ही जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त करता है व प्रत्येक ऐच्छिक वस्तु उसे प्राप्त हो जाती है।

माँ हिंसक सिंह पर सवार रहती हैं, इसका अर्थ ही यही है, कि उन्होनें चुनौतियों से मुख मोड़ा नहीं, अपितु उन्हें स्वीकार करते हुए परास्त भी किया है। चुनौतियाँ केवल बाहुबल के दम पर नहीं अपितु आत्मबल के दम पर जीती जाती हैं। आत्मबल के धनी समस्या रुपी शेर की सवारी करते हैं अर्थात समस्या को अपने अनुकूल बना लेते हैं तो वहीं कमजोर लोग समस्या का शिकार हो जाते हैं। पुरुषार्थ के लिए प्रेरित करने वाले माँ के इस स्वरूप को वंदन करते हैं।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:33 ए एमसूर्यास्त06:45 पी एम
चन्द्रोदय09:14 ए एमचन्द्रास्त11:34 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिपञ्चमी – 06:38 पी एम तकनक्षत्रकृत्तिका – 08:49 पी एम तक
षष्ठीरोहिणी
योगविष्कम्भ – 12:22 पी एम तककरणबव – 07:56 ए एम तक
प्रीतिबालव – 06:38 पी एम तक
वारसोमवारकौलव – 05:21 ए एम, मार्च 24 तक
पक्षशुक्ल पक्षतैतिल
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते9चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिवृषभनक्षत्र पदकृत्तिका – 09:45 ए एम तक
सूर्य राशिमीनकृत्तिका – 03:17 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रउत्तर भाद्रपदकृत्तिका – 08:49 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदउत्तर भाद्रपदरोहिणी – 02:22 ए एम, मार्च 24 तक
  रोहिणी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 11 मिनट्स 49 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 47 मिनट्स 02 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:39 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:58 ए एम से 05:46 ए एमप्रातः सन्ध्या05:22 ए एम से 06:33 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:14 पी एम से 01:03 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:30 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:44 पी एम से 07:07 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:45 पी एम से 07:56 पी एम
अमृत काल06:37 पी एम से 08:05 पी एमनिशिता मुहूर्त12:15 ए एम, मार्च 24 से 01:02 ए एम, मार्च 24
सर्वार्थ सिद्धि योग08:49 पी एम से 06:32 ए एम, मार्च 24रवि योग08:49 पी एम से 06:32 ए एम, मार्च 24

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