आज का पंचांग : चतुर्थ नवरात्रि की मंगल बधाई

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिन्तन

चतुर्थ नवरात्रि की मंगल बधाई

दुनिया में केवल शक्ति सम्पन्न होने मात्र से ही कोई भी वन्दनीय नहीं बन जाता है अपितु उस शक्ति का सही व समय पर प्रयोग करने वालों को ही युगों – युगों तक स्मरण रखा जाता है। केवल सामर्थ्यवान होना पर्याप्त नहीं है अपितु उस सामर्थ्य को लोक मंगल एवं लोक कल्याण में लगाना ही जीवन की परम श्रेष्ठता एवं सार्थकता है।

अथाह शक्ति सम्पन्न होने पर भी माँ दुर्गा ने अपनी सामर्थ्य का प्रयोग कभी भी किसी निर्दोष को दण्डित करने हेतु नहीं किया अपितु केवल और केवल आसुरी वृत्तियों के नाश के लिए ही किया। शक्ति का गलत दिशा में प्रयोग ही तो पाप है।

साधन शक्ति सम्पन्न हो जाने पर कायर बनकर चुप बैठ जाना यह भी एक प्रकार से असुरत्व को बढ़ाने जैसा ही है। अपनी समस्त शक्ति व साधनों को मानवता की रक्षा में लगाने की प्रेरणा हमें माँ जग जननी भगवती से लेनी होगी तभी हम माँ के पुत्र कहलाने योग्य होंगे। नवरात्रि के चतुर्थ दिवस में माँ के “कूष्मांडा” स्वरुप का पूजन व वंदन किया जाता है।

पञ्चाङ्ग
तिथिचतुर्थी – 09:16 पी एम तकनक्षत्रभरणी – 10:42 पी एम तक
पञ्चमीकृत्तिका
योगवैधृति – 03:42 पी एम तककरणवणिज – 10:36 ए एम तक
विष्कम्भविष्टि – 09:16 पी एम तक
वाररविवारबव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते8चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमेष – 04:14 ए एम, मार्च 23 तकनक्षत्र पदभरणी – 11:40 ए एम तक
वृषभभरणी – 05:11 पी एम तक
सूर्य राशिमीनभरणी – 10:42 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रउत्तर भाद्रपदकृत्तिका – 04:14 ए एम, मार्च 23 तक
सूर्य नक्षत्र पदउत्तर भाद्रपदकृत्तिका
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 10 मिनट्स 10 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 48 मिनट्स 41 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:39 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:59 ए एम से 05:47 ए एमप्रातः सन्ध्या05:23 ए एम से 06:34 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:15 पी एम से 01:04 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:30 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:43 पी एम से 07:07 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:44 पी एम से 07:55 पी एम
अमृत काल06:17 पी एम से 07:46 पी एमनिशिता मुहूर्त12:15 ए एम, मार्च 23 से 01:02 ए एम, मार्च 23
रवि योग06:34 ए एम से 10:42 पी एम  

आज का विचार

सत्य हमेशा पानी में तेल की एक बूँद के समान होता है, आप कितना भी पानी डालें वह हमेशा ऊपर ही तैरता है। इसलिए सच्चाइयाँ और सच्चे सम्बन्ध हमेशा क़ायम रहते हैं.!

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