पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का चिंतन
.कभी-कभी हमें दिशा बदलने की ज़रूरत होती है, धैर्य हमेशा एक वैकल्पिक रास्ता नहीं होता। प्रेम के बदले प्रेम देना संभव ना हो तो सम्मान देकर विदा कर दें, तिरस्कार खोखले लोग करते हैं।जब हम खुशी की तलाश करते हैं, तो वह हमें शायद नहीं मिलती।
आज का भगवद् चिन्तन
माँ चंद्रघंटा नमोऽस्तुते
अपने शरणागत की दुर्गति का नाश कर उसको सद्गति प्रदान करने वाली शक्ति का नाम ही दुर्गा है, इसीलिए ‘दुर्गा दुर्गति नाशिनी’ भी कहा गया है। दुर्गा शक्ति की उत्पत्ति के पीछे भी बहुत से कारण हैं, तथापि मुख्यतः जगत जननी माँ जगदम्बा द्वारा दुर्गम नामक असुर का नाश करने के कारण ही उनका नाम ‘दुर्गा’ पड़ा। दुर्गम अर्थात जिस तक पहुंचना आसान काम नहीं अथवा जिसका नाश करना हमारी सामर्थ्य से बाहर हो।
मनुष्य के भीतर छुपे यह काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे दुर्गुण ही तो दुर्गम असुर हैं, जिनका नाश करना आसान तो नहीं लेकिन माँ की कृपा से असंभव भी नहीं है। नारी के भीतर छुपे स्वाभिमान व सामर्थ्य का प्राकट्य ही ‘दुर्गा’ है। परम शक्ति सम्पन्न व परम वन्दनीय होने पर भी जब-जब समाज में नारी के प्रति एक तिरस्कृत भाव रखा जाएगा, तब- तब नारी द्वारा अपने शक्ति प्रदर्शन का नाम ही ‘दुर्गा’ है। नवरात्रि का तृतीय दिवस माँ चन्द्रघंटा को समर्पित है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:35 ए एम | सूर्यास्त | 06:44 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 07:48 ए एम | चन्द्रास्त | 09:16 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | तृतीया – 11:56 पी एम तक | नक्षत्र | अश्विनी – 12:37 ए एम, मार्च 22 तक |
|---|---|---|---|
| चतुर्थी | भरणी | ||
| योग | इन्द्र – 07:01 पी एम तक | करण | तैतिल – 01:14 पी एम तक |
| वैधृति | गर – 11:56 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | वणिज | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 7 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मेष | नक्षत्र पद | अश्विनी – 08:01 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन | अश्विनी – 01:34 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद | अश्विनी – 07:06 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 05:54 पी एम तक | अश्विनी – 12:37 ए एम, मार्च 22 तक | |
| उत्तर भाद्रपद | भरणी – 06:09 ए एम, मार्च 22 तक | ||
| भरणी |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 08 मिनट्स 30 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 50 मिनट्स 21 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:39 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:00 ए एम से 05:48 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:24 ए एम से 06:35 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:15 पी एम से 01:04 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:29 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:43 पी एम से 07:06 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:44 पी एम से 07:55 पी एम |
| अमृत काल | 05:58 पी एम से 07:27 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:15 ए एम, मार्च 22 से 01:03 ए एम, मार्च 22 |
| रवि योग | 12:37 ए एम, मार्च 22 से 06:34 ए एम, मार्च 22 |