पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आज का भगवद् चिन्तन
वीर नहीं, महावीर बनें
सांसारिक मोह की निवृत्ति, राजसत्ता व राजसी ऐश्वर्यों का त्याग एवं आत्मकल्याण की भावना के साथ ही कठिन त्याग, इंद्रिय निग्रह एवं बारह वर्षों की घोर तपस्या ने ही वर्धमान को भगवान महावीर बना दिया। समस्त ऐश्वर्य भण्डार के स्वामी होने पर भी भरे यौवन में आत्म-कल्याण की भावना से किया गया आत्मनियंत्रण एवं आत्ममंथन ही वर्धमान को भगवान बना देता है।
भगवान महावीर स्वामी जी ने कैवल्य प्राप्त किया और मोक्ष प्राप्ति के तीन मूलभूत सिद्धांत ‘त्रिरत्न’ का उपदेश देकर जीव के कैवल्य का मार्ग प्रशस्त किया। भगवान महावीर ने बताया कि हमारे जीवन में किसी वस्तु, पदार्थ अथवा तो ज्ञान का भी केवल होना ही पर्याप्त नहीं है अपितु उसकी सम्यकता भी अनिवार्य है।सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण ही जीव के कल्याण का साधन है।
वस्तु की उचित मात्रा, आवश्यक मात्रा और उपयुक्त मात्रा ही ‘सम्यक’ है। केवल औषधि से रोग ठीक नहीं हो सकता अपितु उसकी उचित, आवश्यक और उपयुक्त मात्रा भी अनिवार्य है। ऐसे ही उचित, आवश्यक एवं उपयुक्त ज्ञान से ही जीवन में कैवल्य घटित होता है। दूसरों को जीतकर वीर बना जा सकता है, लेकिन स्वयं को जीतकर ही महावीर बना जा सकता है।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:24 ए एम | सूर्यास्त | 06:49 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 05:25 पी एम | चन्द्रास्त | 05:40 ए एम, अप्रैल 01 |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | त्रयोदशी – 06:55 ए एम तक | नक्षत्र | पूर्वाफाल्गुनी – 03:20 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| चतुर्दशी | उत्तराफाल्गुनी | ||
| योग | गण्ड – 03:41 पी एम तक | करण | तैतिल – 06:55 ए एम तक |
| वृद्धि | गर – 06:57 पी एम तक | ||
| वार | मंगलवार | वणिज | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 17 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | सिंह – 09:32 पी एम तक | नक्षत्र पद | पूर्वाफाल्गुनी – 09:10 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| कन्या | पूर्वाफाल्गुनी – 03:20 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मीन | उत्तराफाल्गुनी – 09:32 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद – 08:16 पी एम तक | उत्तराफाल्गुनी – 03:46 ए एम, अप्रैल 01 तक | |
| रेवती | उत्तराफाल्गुनी | ||
| सूर्य नक्षत्र पद | उत्तर भाद्रपद – 08:16 पी एम तक | ||
| रेवती |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 25 मिनट्स 01 सेकण्ड |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 33 मिनट्स 51 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:36 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:51 ए एम से 05:38 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:14 ए एम से 06:24 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:12 पी एम से 01:01 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:30 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:48 पी एम से 07:11 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:49 पी एम से 07:58 पी एम |
| अमृत काल | 08:48 ए एम से 10:26 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:13 ए एम, अप्रैल 01 से 12:59 ए एम, अप्रैल 01 |
| रवि योग | 06:24 ए एम से 03:20 पी एम | ||
| 08:16 पी एम से 06:23 ए एम, अप्रैल 01 |