पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आज का चिंतन
बदलाव कष्ट देता है पर जरूरी भी है। जीवन सबसे बड़ा स्कूल है, क्योंकि हम कभी नहीं जानते कि हम किस कक्षा में हैं और अब हमें कौन सी परीक्षा देनी है।
आज का भगवद् चिंतन
व्यवहार की कला
व्यवहार की कला ही जीवन में मधुर संबधों को स्थापित करती है। दूसरों के साथ अनुचित व्यवहार करने से पूर्व विचार करो कि हमारा व्यवहार किसी को आहत करने वाला न हो। अपने जीवन को वेदमय बनाकर जियो, भेदमय बनाकर नहीं। शास्त्र कहते हैं कि दूसरों के साथ कभी भी वह व्यवहार मत करो जो तुम्हे स्वयं पसंद न हो। आत्मरूप समझकर सबसे प्रेम करो और सबका सम्मान करना सीखो।
अपनी दृष्टि को व्यापक बनाते हुए ये जानने का प्रयास करें कि आत्मा, परमात्मा का ही एक रूप है। सबके भीतर उसी एक परमात्म रूप का दर्शन करते हुए व्यवहार करना ही सर्वोत्तम व्यवहार है। अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए बात-बात पर दूसरों की भावनाओं को आहत करना, दूसरों को प्रताड़ित करना यही तो भेद दृष्टि है एवं हरि व्यापक सर्वत्र समाना की भावना रखते हुए सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना ही वेद दृष्टि है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वितीया – 10:08 ए एम तक | नक्षत्र | स्वाती – 09:35 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| तृतीया | विशाखा | ||
| योग | हर्षण – 02:17 पी एम तक | करण | गर – 10:08 ए एम तक |
| वज्र | वणिज – 11:01 पी एम तक | ||
| वार | शनिवार | विष्टि | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | वैशाख – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 21 | चैत्र – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | तुला | नक्षत्र पद | स्वाती – 08:27 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | मीन | स्वाती – 03:00 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | रेवती | स्वाती – 09:35 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | रेवती | विशाखा – 04:11 ए एम, अप्रैल 05 तक | |
| विशाखा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 31 मिनट्स 34 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | वसन्त | रात्रिमान | 11 घण्टे 27 मिनट्स 19 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:35 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:48 ए एम से 05:34 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:11 ए एम से 06:20 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:10 पी एम से 01:00 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:31 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:50 पी एम से 07:13 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:51 पी एम से 08:00 पी एम |
| अमृत काल | 11:59 ए एम से 01:44 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:12 ए एम, अप्रैल 05 से 12:58 ए एम, अप्रैल 05 |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 06:20 ए एम से 09:35 पी एम |