आज का पंचांग : प्रकृति सब याद रखती है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन
प्रकृति सब याद रखती है

अच्छा-बुरा व ज्ञात-अज्ञात में जो भी कर्म आपने किये उनको मनुष्य भूल जाता है, लेकिन प्रकृति कभी नहीं भूलती। यदि आपके द्वारा शुभ कर्मों के बीज बोये जाते हैं तो फल की आशा रहित होकर निश्चिंत हो जायें क्योंकि समय आने पर शुभ बीज के शुभ वृक्ष का शुभ फल ही आपको प्राप्त होने वाला है। जो मनुष्य दूसरों का भला करके भूल जाते हैं, उनका हिसाब प्रकृति स्वयं याद रखा करती है। अपने पुण्यों के स्वयं ज्यादा बखान करने से भी उनका फल नष्ट हो जाता है।

जो मनुष्य आदतन अपने पुण्यों का बही-खाता लिए फिरते हैं, इस प्रकृति द्वारा फिर उनके पुण्य कर्मों को विस्मृत कर दिया जाता है। इस जीवन में जो भी पुण्य कर्म आपके द्वारा संपन्न किये जाते हैं, सत्य समझ लेना यह प्रकृति निश्चित ही उन्हें संचित कर देती है और आवश्यकता पड़ने पर आपकी विस्मृति के बावजूद भी उनका यथा योग्य फल अवश्य ही दे दिया करती है। भला करो और भूल जाओ उचित समय आने पर प्रकृति आपको स्वयं पुरस्कृत कर देगी।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:14 ए एमसूर्यास्त06:54 पी एम
चन्द्रोदय01:37 ए एम, अप्रैल 10चन्द्रास्त10:52 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथिसप्तमी – 09:19 पी एम तकनक्षत्रमूल – 08:48 ए एम तक
अष्टमीपूर्वाषाढा
योगपरिघ – 05:58 पी एम तककरणविष्टि – 08:12 ए एम तक
शिवबव – 09:19 पी एम तक
वारगुरुवारबालव
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते26चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिधनुनक्षत्र पदमूल – 08:48 ए एम तक
सूर्य राशिमीनपूर्वाषाढा – 03:30 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररेवतीपूर्वाषाढा – 10:11 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदरेवतीपूर्वाषाढा – 04:50 ए एम, अप्रैल 10 तक
  पूर्वाषाढा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 39 मिनट्स 38 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 19 मिनट्स 17 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:34 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:43 ए एम से 05:29 ए एमप्रातः सन्ध्या05:06 ए एम से 06:14 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:09 पी एम से 12:59 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:53 पी एम से 07:15 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:54 पी एम से 08:02 पी एम
अमृत काल06:08 ए एम, अप्रैल 10 से 07:54 ए एम, अप्रैल 10निशिता मुहूर्त12:11 ए एम, अप्रैल 10 से 12:56 ए एम, अप्रैल 10
रवि योग06:14 ए एम से 08:48 ए एम 

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