आज का पंचांग : व्यक्तित्व निमार्ण

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:03 ए एमसूर्यास्त07:00 पी एम
चन्द्रोदय07:58 ए एमचन्द्रास्त10:29 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथितृतीया – 07:27 ए एम तकनक्षत्ररोहिणी – 02:08 ए एम, अप्रैल 21 तक
चतुर्थी – 04:14 ए एम, अप्रैल 21 तकमृगशिरा
पञ्चमीकरणगर – 07:27 ए एम तक
योगसौभाग्य – 04:11 पी एम तकवणिज – 05:49 पी एम तक
शोभनविष्टि – 04:14 ए एम, अप्रैल 21 तक
वारसोमवारबव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते7वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिवृषभनक्षत्र पदरोहिणी – 09:57 ए एम तक
सूर्य राशिमेषरोहिणी – 03:20 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीरोहिणी – 08:43 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनी – 05:11 ए एम, अप्रैल 21 तकरोहिणी – 02:08 ए एम, अप्रैल 21 तक
अश्विनीमृगशिरा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 56 मिनट्स 53 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 02 मिनट्स 08 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:34 ए एम से 05:19 ए एमप्रातः सन्ध्या04:56 ए एम से 06:03 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:05 पी एम से 12:57 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:33 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:58 पी एम से 07:21 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:00 पी एम से 08:06 पी एम
अमृत काल11:16 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 21निशिता मुहूर्त12:09 ए एम, अप्रैल 21 से 12:53 ए एम, अप्रैल 21
सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिनअमृत सिद्धि योग02:08 ए एम, अप्रैल 21 से 06:02 ए एम, अप्रैल 21
रवि योग06:03 ए एम से 02:08 ए एम, अप्रैल 21

आज का भगवद् चिंतन
व्यक्तित्व निमार्ण

विचारों से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है। मनुष्य के सिवा अन्य कोई भी प्राणी श्रेष्ठ विचारों द्वारा एक श्रेष्ठ जीवन का निर्माण नहीं कर सकता है। मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसका व्यक्तित्व निर्माण प्रकृति से ज्यादा उसकी स्वयं की प्रवृत्ति पर निर्भर होता। मनुष्य के अलावा अन्य सभी प्राणी का निर्माण प्रकृति ने जैसा कर दिया, कर दिया। अब उसमें और बेहतर बनने की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।

मनुष्य में जीवन के अंतिम क्षणों तक विचार परिवर्तन से जीवन परिवर्तन के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह अपने जीवन को अपने अनुसार उत्कृष्ट या निकृष्ट बना सकने में समर्थ होता है। पशु के जीवन में पशु से पशुपतिनाथ बनने की संभावना नहीं होती पर एक मनुष्य के जीवन में श्रेष्ठ विचार, श्रेष्ठ संग और महापुरुषों के आश्रय से नर से नारायण बनने की प्रबल संभावना विद्यमान रहती है। जीवन में सद्गुणों की बहुलता ही इंसान को भगवान बना देती है।

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