आज का पंचांग : संग्रह नहीं, दान श्रेष्ठ है

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन
संग्रह नहीं, दान श्रेष्ठ है

संग्रह की अपेक्षा दान को सदैव श्रेष्ठ माना गया है। स्वयं की इच्छा से किसी वस्तु अथवा पदार्थ को छोड़ना त्याग तथा स्वयं की इच्छा न होते हुए किसी वस्तु अथवा पदार्थ का छूट जाना नाश कहलाता है। त्याग और नाश ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। प्रकृति का अपना एक शाश्वत नियम है कि यहाँ मान, पद, प्रतिष्ठा, वैभव कुछ भी और कभी भी शाश्वत नहीं रहता है। जो बाँटना नहीं जानते समय उनसे लेना भी जानता है।

जिन फलों को वृक्ष द्वारा बाँटा नहीं जाता एक समय उन फलों में अपने आप सड़न आने लगती है और वो सड़कर वृक्ष को भी दुर्गंधयुक्त कर देते हैं। इसी प्रकार समय आने पर प्रकृति द्वारा सब कुछ स्वतः ले लिया जायेगा, अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप बाँटकर अपने यश और कीर्ति की सुगंधी को बिखेरना चाहते या संभालकर संग्रह और आसक्ति की दुर्गंध को रखना चाहते हैं। कुआँ अपना जल सबको बाँटता है इसलिए स्वच्छ बना रहता है।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:04 ए एमसूर्यास्त06:59 पी एम
चन्द्रोदय07:06 ए एमचन्द्रास्त09:18 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिद्वितीया – 10:49 ए एम तकनक्षत्रभरणी – 07:10 ए एम तक
तृतीयाकृत्तिका – 04:35 ए एम, अप्रैल 20 तक
योगआयुष्मान् – 08:02 पी एम तकरोहिणी
सौभाग्यकरणकौलव – 10:49 ए एम तक
वाररविवारतैतिल – 09:07 पी एम तक
पक्षशुक्ल पक्षगर
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते6वैशाख – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमेष – 12:31 पी एम तकनक्षत्र पदभरणी – 07:10 ए एम तक
वृषभकृत्तिका – 12:31 पी एम तक
सूर्य राशिमेषकृत्तिका – 05:52 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रअश्विनीकृत्तिका – 11:13 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदअश्विनीकृत्तिका – 04:35 ए एम, अप्रैल 20 तक
  रोहिणी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 55 मिनट्स 21 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 03 मिनट्स 39 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:35 ए एम से 05:19 ए एमप्रातः सन्ध्या04:57 ए एम से 06:04 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:06 पी एम से 12:57 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:32 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:58 पी एम से 07:20 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:59 पी एम से 08:06 पी एम
अमृत काल02:26 ए एम, अप्रैल 20 से 03:52 ए एम, अप्रैल 20निशिता मुहूर्त12:09 ए एम, अप्रैल 20 से 12:53 ए एम, अप्रैल 20
त्रिपुष्कर योग07:10 ए एम से 10:49 ए एमरवि योग04:35 ए एम, अप्रैल 20 से 06:03 ए एम, अप्रैल 20

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