आज का पंचांग : जीवन में जब गुस्सा आए, तब तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें और कुछ देर शांत रहने की आदत डालें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

एक लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक शक्तिशाली राजा था। उसके पास धन-दौलत, विशाल राजमहल, सेवक, सुख-सुविधाएं और आज्ञाकारी प्रजा सब कुछ था। परिवार भी सुखी था और राज्य में किसी प्रकार की कमी नहीं थी। बाहर से देखने पर लगता था कि राजा सबसे खुश इंसान है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। राजा का मन हमेशा अशांत रहता था। उसे रात में नींद नहीं आती थी और छोटी-छोटी बातों पर वह गुस्सा हो जाता था, परेशान हो जाता था। मन की बेचैनी ने उसकी खुशियां छीन ली थीं।

एक दिन राजा ने अपने नगर के प्रसिद्ध संत के बारे में सुना, जिनके पास लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने आते थे। राजा तुरंत संत के आश्रम पहुंचा। उसने संत को प्रणाम किया और विनम्रता से कहा, “गुरुदेव, मेरे पास सब कुछ होते हुए भी मन में शांति नहीं है। कृपया ऐसा उपाय बताइए, जिससे मेरा मन शांत हो सके।”

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:36 ए एमसूर्यास्त07:24 पी एम
चन्द्रोदय10:13 पी एमचन्द्रास्त07:35 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथितृतीया – 09:21 पी एम तकनक्षत्रपूर्वाषाढा – 12:59 ए एम, जून 04 तक
चतुर्थीउत्तराषाढा
योगशुभ – 08:12 ए एम तककरणवणिज – 08:12 ए एम तक
शुक्लविष्टि – 09:21 पी एम तक
वारबुधवारबव
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ ( पुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते20ज्येष्ठ (पुरुषोत्तमअधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिधनुनक्षत्र पदपूर्वाषाढा – 11:34 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभपूर्वाषाढा – 06:17 पी एम तक
सूर्य नक्षत्ररोहिणीपूर्वाषाढा – 12:59 ए एम, जून 04 तक
सूर्य नक्षत्र पदरोहिणीउत्तराषाढा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 48 मिनट्स 01 सेकण्ड
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 11 मिनट्स 49 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:30 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:56 ए एमप्रातः सन्ध्या04:35 ए एम से 05:36 ए एम
अभिजित मुहूर्तकोई नहींविजय मुहूर्त02:48 पी एम से 03:44 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:23 पी एम से 07:44 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:24 पी एम से 08:26 पी एम
अमृत काल07:37 पी एम से 09:24 पी एमनिशिता मुहूर्त12:10 ए एम, जून 04 से 12:51 ए एम, जून 04